दीप्ति खरे
मंडला (मध्यप्रदेश)
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कौन जगाता है सोई हिम्मत,
जब मन हारने लगता है ?
कौन अँधेरों के बीच खड़ा,
उजियारा करने लगता है ?
प्रेरणा जगाती सोई हिम्मत,
मन में आशा का दीप जलाती है
ठहरे हुए कदमों को वह,
फिर से चलना सिखलाती है।
कभी गिरकर फिर उठने वाला,
मन को साहस दे जाता है
पेड़ से टूटता पत्ता भी कभी,
जीवन का अर्थ समझा जाता है।
किसी के कर्म किसी की हिम्मत,
मन में उत्साह जगाते हैं
कभी किसी का सदाचरण,
सत्कर्म की राह दिखाता है।
नजर चाहिए देखने की,
यह आसपास मिल जाती है।
छोटी-छोटी बातों से यह,
जीना सिखला जाती है॥