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भीतर का रावण मरा नहीं…

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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भीतर का रावण (विजयादशमी विशेष)…

रावण अभी मरा नहीं,
त्रेता वाले रावण तो त्रेता में ही मरे
लेकिन कलियुग का रावण सभी के दिलों में,
अभी भी जीवित है।

रावण के दस सिर थे,
आज के रावण सभी के दिलों में बसे रहते हैं
त्रेता वाले रावण ने राम को चुनौती दी,
आज के रावण पूरे देश को तबाह कर रहे हैं।

प्रतीक के रूप में रावण के दस सिर
दशहरे में मारे जाते हैं,
अपने अंदर की कामनाओं
और दुर्गुणों से लड़ने की,
प्रेरणा देते रहते हैं।

हर इंसान के भीतर अच्छाई के राम
और कमजोरियों के रावण के बीच
मुठभेड़ चलती रहती है,
उम्मीद और साहस का पर्व है दशहरा
काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, ईर्ष्या और द्वेष,
मन के अंदर के रावण के गुण हैं।

आज सबके अंदर बुराइयाँ हैं
छोटी-छोटी बातों में ही स्वार्थ झलकता है,
अपने स्वार्थ में इतना गिर जाते हैं कि
प्रेम, दया, करुणा और त्याग भूलकर,
दूसरों को नीचे गिराने में लग जाते हैं।

जो आप ये सब कर रहे हैं, रावण में भी यही गुण थे,
एक सुंदर बच्चा बचपन में राम बना था।
वही बड़ा होकर रावण बन बैठा,
अपने भीतर के रावण को ही मारना,
इस पर्व का संदेश होता है॥