कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,
हैदराबाद (तेलंगाना)
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पन्नों में सिमटी रोशनी,
अक्षर-अक्षर दीपक हैं
ज्ञान की इस पावन धारा में,
जीवन के सब प्रतिबिंबक हैं।
जब-जब मन पथ से भटका,
जब-जब राहें अंधियारी थीं
पुस्तक बनकर साथी मेरी,
ले आई नई चिंगारी थीं।
ये केवल शब्दों का मेल नहीं,
अनुभव की गहराई हैं
हर पंक्ति में छिपी हुई,
सदियों की सच्चाई है।
कभी बनकर गुरु सिखाती,
कभी मित्र-सी समझाती है
जीवन के हर उतार-चढ़ाव में,
साहस भी यह बढ़ाती है।
आओ मिलकर प्रण ये लें,
पढ़ने का दीप जलाएँगे
हर दिल में ज्ञान की खुशबू,
पुस्तकों से महकाएँगे।
पुस्तक ही है सच्चा धन,
जिसका ना कोई अंत है।
जिसने इसे अपनाया जीवन में,
उसका हर क्षण अनंत है॥
परिचय – कवि व अनुवादक कमलेकर नागेश्वर राव का साहित्यिक उपनाम ‘कमल’ है। आप सरकारी अध्यापक (हिंदी) ने रूप में जिला नागर कर्नूल के वेल्दंडा में कार्यरत हैं। तेलंगाना राज्य के रंगा रेड्डी जिले में निवासरत ‘कमल’ की तेलुगू और हिंदी के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ व विशेष आलेख प्रकाशित होते रहते हैं। इनको श्री श्री कला वेदिका राजमंड्री वालों से ‘साहिती मित्रा’ पुरस्कार, आदित्य संस्कृति (मप्र) से ‘हिंदी सेवी’ तथा डाॅ.सीता किशोर खरे स्मारक साहित्य पुरस्कार आदि मिले हैं।