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वाह चाय

ममता साहू
कांकेर (छत्तीसगढ़)
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व्यवहार में चाय (राष्ट्रीय चाय दिवस विशेष)…

हाय रे चाय, वाह रे चाय,
सुबह से तेरी याद सताए
बिन तेरे रहा ना जाए,
गरमा-गरम जब तू आए,
क्या कहें दिन बन जाए।

देख के तुमको मन ललचाए,
मिले ना तू तो सर चकराए
सुबह-शाम तू ही भाए,
बिन तेरे मन भरमाए
हाय रे चाय, वाह रे चाय।

जो तू आए मूड बनाए,
स्फूर्ति जगाए काम बनाए
जहां भी जाए रंग जमाए,
तेरी रहमत कोई क्या बताए
हाय रे चाय, वाह रे चाय।

संग तेरे महफ़िल बन जाए,
हर कोई तुझे बुलाए
तू जो है संग हमारे,
मेहमान सारे खुश हो जाएँ।
सुबह से तेरी याद सताए,
हाय रे चाय, वाह रे चाय॥