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हिंदी के बढ़ते कदम से बेहतर उम्मीद

पद्मा अग्रवाल
बैंगलोर (कर्नाटक)
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हिंदी दुनिया में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। हिंदी दिवस भारतीय दूतावासों और विदेशों में स्थित शैक्षणिक संस्थानों में विशेष रूप से मनाया जाता है, ताकि गैर हिंदी भाषियों को हिंदी भाषा के साथ जोड़ा जा सके। ‘विश्व हिंदी दिवस’ हमें अपनी भाषाई जड़ों पर गर्व करने और वैश्विक मंच पर अपनी भाषा का सम्मान बखाने की प्रेरणा देता है।
‘विश्व हिंदी दिवस’ के दिन हम गर्व से कह सकते हैं कि हमारी हिंदी भाषा नेपाल, फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम, सिगापुर, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, न्यूजीलैंड, अमेरिका, यूके, त्रिनिदाद, टॉबेगो सहित जर्मनी और इटली में भी समझी, बोली और लिखी भी जाती है।
कई देशों जैसे सूरीनाम, फिजी और मॉरीशस में तो यहाँ तक कि हिंदी को क्षेत्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी हुई है।
‘विजुअल कैपिटलिस्ट‘ की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की प्रमुख भाषा के रूप में हिंदी का प्रयोग लगभग ६१० मिलियन लोग करते हैं। वहीं  ‘स्टेटिस्टा डॉट कॉम’ की रिपोर्ट अनुसार हिंदी भाषा के इंटरनेट प्रयोग करने वालों की संख्या लगभग ५०० मिलियन है। इसी कारण हिंदी भाषा के डिजिटल समाधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग के लिए अनेक नए तरीके बनाए जा रहे हैं।
इंडियन ‘पब्लिशरडॉट कॉम्स’ के  अनुसार २०२२ में हमारे मीडिया ने ए.आई. से संचालित समाचार लेखन के समाधानों पर २० मिलियन डॉलर खर्च किए।
इसी तरह से मुंबई आई.आई.टी. द्वारा विकसित ‘भगिनी’ प्लेटफॉर्म हिंदी व २१ भाषाओं के लिए स्पीच टू टेक्स्ट और अनुवाद की सुविधा दे रहा है। यानी दुनिया में तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली हिंदी भाषा को बाजार ने भी हाथों-हाथ लिया है। विश्व की प्रमुख कंपनियाँ भी अँग्रेजी का मोह छोड़ कर हिंदी मय हो गई हैं। एक अरसा पहले तक डेटा की कमी के कारण एल्गोरिद्म प्रशिक्षण की गति काफी धीमी थी और मँहगी तकनीक एक चुनौती  थी, पर ए.आई. पर लगातार बढ़ती निर्भरता, बचने वाला समय और समाधानों की वैश्विक माँग के कारण भारत सरकार, निजी संस्थान और मीडिया अपने स्तर पर ए.आई. के नए समाधान खोजकर मील का पत्थर जोड़ रहे हैं। हमें विश्वास है, कि भविष्य में हिंदी भाषा में करिश्माई नवाचार हमारे सामने होंगें।