बच्चे

गायत्री चौधरी ‘सोनू’
मन्दसौर(मध्यप्रदेश) 
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एक दिन जब मैं अपनी कालोनी में अपने घर का निरीक्षण करने गई। तब मैंने देखा कि उस कालोनी में एक तरफ बने पार्क में दो-चार बच्चे खेल रहे हैं। तब मैंने देखा कि आज तो शाला का दिन है,फिर बच्चे पार्क में इतने समय क्या कर रहे ! मन में न जाने एक बाद एक अनगिनत सवालों का सैलाब आने लगा। मैंने अपने जीवन साथी से कहा-गाड़ी उस पार्क की ओर ले चलो। उन्होंने गाड़ी को पार्क की ओर बढ़ाया। तब मैं गाड़ी से उतरकर उन बच्चों की और कदम बढ़ाने लगी। कुछ बच्चे मुझसे थोड़े शरमाने लगे और झूले से दूर हटने लगे। मैंने उनसे कहा-इधर आओ बच्चों,आप आज शाला नहीं गए ?

तो उसमें से एक बड़ी लड़की बोली-शाला तो हम नहीं जाते,हम अपने भाई- बहनों का ध्यान रखते हैं। हमारे माता-पिता इस कॉलोनी के मकानों में काम करते हैं। हमने आज तक शाला का मुँह तक नहीं देखा दीदी।
तब मेरे मन को बहुत बड़ा धक्का लगा,  कि सरकार एक ओर तो पूरा साक्षर भारत बनाना चाहती है और
इन घुमक्कड़ जाति के बच्चों का भविष्य अंधकार की ओर जा रहा है। ये चाहकर भी शाला जाने में असमर्थ हैं।
मैंने बोला-तुम शाला जाना चाहते हो ?
तो सभी बच्चे एकसाथ बोले-जी दीदी जाना तो चाहते हैं,लेकिन हमारे भाई-बहनों को कौन संभालेगा और माता पिता घर पर रहेंगे तो कमाकर कौन ख़िलाएगा ? ये सुनकर मेरा मन अचानक दुःखी हो गया,और जबान भी कुछ बोलने में लड़खड़ाने लगी।
मेरे पति की भी आवाज आ रही थी-चलो क्या कर रही हो,उन बच्चों से क्या पूछने लगी..इतनी देर हो गई।
 मैं भी अंदर से रोते हुए स्वर से बोली-आती हूं जी।
जब में आने लगी तो उन बच्चों की मुस्कान मेरे दिल को छू रही थी। मैं सोच रही थी कि मेरे देश के भविष्य का जीवन धीरे-धीरे तम की ओर बढ़ रहा है,और मैं एक शिक्षिका होते हुए इनके लिए कुछ नहीं कर पा रही हूँ।
 मन में एक ख्याल आया कि जब मैं उस कालोनी में अपने घर में रहने जाऊँगी, तब उन बच्चों को घर बुलाकर कम-से-कम जीवन उपयोगी शिक्षा देने का प्रयास करूँगी,और उनके माता-पिता को उनको रोज शाला भेजने के लिए अपने स्तर से प्रेरित करूँगी।
मैं सोचती हूँ कि सरकार क्यों नहीं इन गरीबों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने के लिए उचित कदम उठाती है,और इन बच्चों को ये जहां जाकर काम करते हैं, वहीं के आसपास के विद्यालयों में इनकी शिक्षा-दीक्षा की व्यवस्था क्यों नहीं करती है ?
अगर सरकार इस ओर अपना थोड़ा रुख मोड़ ले तो शायद ये बच्चे निरक्षर की गिनती में न आएँगे, और अन्य बच्चों की भांति इनका भी जीवन प्रकाशमय बन जाएगा।
परिचय-गायत्री चौधरी का साहित्यिक उपनाम-सोनू हैl इनकी जन्मतिथि-१० दिसम्बर १९८३ तथा जन्म स्थान-सिवनी(मध्यप्रदेश)हैl वर्तमान में मध्यप्रदेश के मन्दसौर में निवासरत हैंl आपकी शिक्षा-एम.ए.(राजनीति) और कार्यक्षेत्र-सहायक अध्यापक हैl आपको लेखन का काफी शौक हैl सामाजिक क्षेत्र में सोनू जैन शिक्षा की जागृति के लिए कार्यरत होने के साथ ही समाज के मंडल की सदस्या भी हैंl लेखन में आपकी विधा-कविता,ग़ज़ल,संस्मरण एवं लेख हैl सम्मान में गायत्री चौधरी को `साहित्य चेतना` पुरस्कार मिला हैl उपलब्धि में आपके खाते में गायन,खेल,चित्रकारी और रक्तदान करना हैl आपके लेखन का उद्देश्य-सामाजिक जागरुकता,महिला-बालिका शिक्षा को बढ़ाना,अधिकार, राष्ट्रभक्ति सहित सेना का हौंसला भी बढ़ाना हैl आप लेखन के सामाजिक माध्यमों में भी सक्रियता से अपनी बात रखती हैंl 

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