स्वतंत्रता दिवस

सुश्री नमिता दुबे
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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यह सच है कि स्वतन्त्रता दिवस का आगमन हमें रोमांच से भर रहा है,मन में एक ऐसा भाव पैदा हो रहा है जिसे व्यक्त नहीं किया जा सकता है। लोग व्हाट्सअप-फेसबुक की डी.पी. पर अपने नाम के साथ तिरंगा लगा रहे हैं,और तिरंगे की लुभावनी डी.पी. से अपने देशप्रेम को दर्शाने में सभी में होड़ लगी है। इस दिन देश के लिए त्याग की भावना अपने चरम पर होती है पर क्या स्वतन्त्रता दिवस,गणतंत्र दिवस पर जोशीले नारे और तस्वीर-सन्देश देना ही देश प्रेम है ? आज हम अखबार उठाकर देखें तो ९० प्रतिशत खबरें भ्रष्टाचार,  दुष्कर्म,चोरी,डकैती,प्राकृतिक आपदा, हत्या और आत्महत्या से भरी होती हैंI यह सब पढ़-देखकर दिल दहल उठाता है।
   अब कहाँ है तिरंगे के केशरिया का वीरत्व ? दरअसल वीरता के मायने बदल गए हैंI दुष्कर्मी,चोर,डकैत,और भ्रष्टाचारी वीर हो रहे हैं और शेष लोग मूकदर्शक बने बेबस इन्हें देख रहे हैंI हमारी खंडित एकता एक बार फिर इन्हें देश पर हावी होने के लिए आमंत्रित कर रही है।  मुगलों की अकर्मण्यता,खंडित एकता और स्वार्थ ने हमें अंग्रेजों का गुलाम बनाया और उनकी नाकामी के लिए हमारे देश के क्रान्तिकारियो को २०० वर्ष संघर्ष करना पड़ा। लाखों लोगों के बलिदान से प्राप्त आज़ादी को हम एक बार फिर चंद नेताओं के स्वार्थ की बलि चढ़ा रहे हैं।
        तिरंगे का हरा रंग अब कहाँ हरियाली और खुशहाली को दर्शा रहा है! विकास की अंधी दौड़ में हम अपनी धरती का स्वार्थ पूर्ण दोहन करते जा रहे हैंI जंगल नष्ट हो रहे हैं,अट्टाहास करती ऊँची-ऊँची इमारतें हमें प्रकृति से कोसों दूर ले जा रही है। कृषि क्रान्ति से उत्पादन बढ़ने के बावजूद भी किसान कर्ज में दबे जा रहे हैं और विकास के साथ कदमताल न करने से आत्महत्या के शिकार हो रहे हैं। प्राकृतिक संतुलन गड़बड़ा रहा है,तो अमीरी-गरीबी की खाई ज्यों की त्यों बनी हुई हैI आदिवासी पिछड़ी जनजाति को विकास में हमसफ़र बनाने हेतु संविधान निर्माण के समय १० वर्ष के लिए विशेष प्रलोभन (आरक्षण)दिए गए,किन्तु राजनीतिक स्वार्थ ने उन्हें सदा के लिए प्रलोभन की बैसाखी देकर अपंग बना दिया I भ्रष्टाचार का यह आलम है कि वर्ष-२ वर्ष में ही करोड़ों की लागत से बना पुल धराशाई हो जाता है। कहीं बाढ़,कहीं भूकंप,कहीं आगजनी यह सभी हमारे ही कर्मों का ही तो प्रतिफल है। युवा रोजगार के अभाव में कुंठित हो चोर,डकैत या दुष्कर्मी बन रहा है।
   शान्ति के प्रतीक श्वेत रंग को भी भस्मासुर निगल रहा हैI बढ़ती आबादी और विकास की होड़ ने हमें समस्याओं के भंवर में फंसा दिया है। प्रदूषण, पर्यावरण असंतुलन,बेरोजगारी,पेयजल, स्वच्छता,एवं स्वास्थ समस्याओं के चलते जीवन की गुणवत्ता में कमी आई है I इन सबके चलते कहाँ है अब जीवन में शान्ति ? मनुष्य,मनुष्य का दुश्मन बन गया है। चार माह की बच्ची को हवस का शिकार बनाते अब किसी दुष्कर्मी के हाथ नहीं काँपते हैंI
    देशप्रेम के बहाव में बहने से पहले रुकिए और सोचिए कि क्या हम अपने शहीदों के बलिदान का उचित मोल दे रहे हैं ? क्या हमारा कर्तव्य नहीं है कि हमारे वीर शहीदों ने हमें स्वतन्त्रता की जो सौगात दी है,उसे खुशहाली और शान्ति देकर अमरत्व प्रदान करेंI
फेसबुक और व्हाट्सअप की डी.पी. में तिरंगा लगाने से देशप्रेम की इतिश्री नहीं हो सकती,इसके लिए हर व्यक्ति को पर्यावरण संतुलन बनाने हेतु वृक्ष लगाने होंगे,जल सुरक्षा,भूमिगत जलस्तर,ऊर्जा संसाधन और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के न केवल उचित दोहन की आवश्यकता है,वरन इनके वैकल्पिक साधन भी खोजने होंगे I देश में ऐसे बहुत से लोग होंगे जो गलत काम करने या कानून तोड़ने में गर्व अनुभव करते होंगे I क्या उनके लिए देशप्रेम की परिभाषा अलग है ? नहीं,यह केवल भटकाव है, एक ऐसा सन्नाटा जो देश और समाज के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाता है I इन बुराइयों को दूर करने हेतु लोगों में सोच विकसित करनी होगी। अंतर्मन में भाव पैदा करने होंगे,क्योंकि देश का प्रत्येक नागरिक देश के लिए  समान रूप से जिम्मेदार है,उसका कार्य ही उसके परिवार,समाज और देश का चरित्र निर्माण करता है। आईए,हम सभी अपनी जिम्मेदारियों को समझें और एक-दूसरे से कंधा मिलाकर देश के विकास की राह में पड़ने वाले अवरोधों को दूर कर शान्ति और समृद्धि का वातावरण निर्मित कर तिरंगे के तीनों रंगों को सार्थक बनाएंI एक ऐसा समाज बनाएं जो देश की स्वर्णिम धरोहर बन जाए और आगे आने वाली पीढ़ी इससे प्रेरणा लेकर विश्व शान्ति के मार्ग पर अग्रसर हो, जो भारत को वीर ‘शान्ति सम्राट’ के रूप में अमर रखे।
परिचय : सुश्री नमिता दुबे का जन्म ग्वालियर में ९ जून १९६६ को हुआ। आप एम.फिल.(भूगोल) तथा बी.एड. करने के बाद १९९० से वर्तमान तक शिक्षण कार्य में संलग्न हैं। आपका सपना सिविल सेवा में जाना था,इसलिए बेमन से शिक्षक पद ग्रहण किया,किन्तु इस क्षेत्र में आने पर साधनहीन विद्यार्थियों को सही शिक्षा और उचित मार्गदर्शन देकर जो ख़ुशी तथा मानसिक संतुष्टि मिली,उसने जीवन के मायने ही बदल दिए। सुश्री दुबे का निवास इंदौर में केसरबाग मार्ग पर है। आप कई वर्ष से निशक्त और बालिका शिक्षा पर कार्य कर रही हैं। वर्तमान में भी आप बस्ती की गरीब महिलाओं को शिक्षित करने एवं स्वच्छ और ससम्मान जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। २०१६ में आपको ज्ञान प्रेम एजुकेशन एन्ड सोशल डेवलपमेंट सोसायटी द्वारा `नई शिक्षा नीति-एक पहल-कुशल एवं कौशल भारत की ओर` विषय पर दिए गए श्रेष्ठ सुझावों हेतु मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा और कौशल मंत्री दीपक जोशी द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा श्रेष्ठ शिक्षण हेतु रोटरी क्लब,नगर निगम एवं शासकीय अधिकारी-कर्मचारी संगठन द्वारा भी पुरस्कृत किया गया है।  लेखन की बात की जाए तो शौकिया लेखन तो काफी समय से कर रही थीं,पर कुछ समय से अखबारों-पत्रिकाओं में भी लेख-कविताएं निरंतर प्रकाशित हो रही है। आपको सितम्बर २०१७ में श्रेष्ठ लेखन हेतु दैनिक अखबार द्वारा राज्य स्तरीय सम्मान से नवाजा गया है। आपकी नजर में लेखन का उदेश्य मन के भावों को सब तक पहुंचाकर सामाजिक चेतना लाना और हिंदी भाषा को फैलाना है।

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