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अतुलनीय पिता जी

उमेशचन्द यादव
बलिया (उत्तरप्रदेश) 
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‘पिता का प्रेम, पसीना और हम’ स्पर्धा विशेष…..

आओ मेरे प्यारे मित्रों,दिल की बात बताता हूँ,
पिता जी मेरे परम हितैषी,गाथा उनकी गाता हूँ।
करतब उनका लिख ना पाऊँ,माथा मैं नवाता हूँ,
आओ मेरे प्यारे मित्रों,दिल की बात बताता हूँ॥

अगर पिता जी कहीं भी जाते,खाली हाथ ना आते थे,
फल या मिठाई जो भी होता,घर में लेकर आते थे।
हरदम रहते ताक में हम भी,सबसे पहले जाते थे,
क्या लाए बाबूजी मेरे,देखकर उन्हें धधाते थे।

हो मेला या शादी-दंगल,बाबूजी हमें ले जाते थे,
चलना जब मुश्किल हो जाता,कंधे पर हमें उठाते थे।
खुद थोड़ा-सा खाकर के वे,हमें बहुत ही खिलाते थे,
पढ़ना-लिखना खुद ना जाने,लेकिन हमें पढ़ाते थे।

पढ़ने हेतु हम घर से जाते,बाबूजी खेत में जाते थे,
सो जाते वे पानी पीकर,दूध-भात हमें वे खिलाते थे।
खुद ही पहनते फटे-पुराने,हमें ड्रेस सिलवाते थे,
मास्टर जी कभी गुस्सा करें तो,स्कूल पहुंच वे जाते थे।

हम बच्चों का रोना सिसकना,बाबूजी सह नहीं पाते थे,
अगर चाहें हम झूला झूलना तो,बाँहों में हमें झुलाते थे।
गर्मी के मौसम में बाबूजी,आम-जामुन खूब खिलाते थे,
खुद खा लेते खट्टे-खट्टे,मीठे हमें खिलाते थे।

अगर कहीं गलती हो जाती,बाबूजी हमें बचाते थे,
भागे-भागे हम घर आए तो,सीने से हमें लगाते थे।
लेकर लाठी सीना ताने,बैरी को पीछे भगाते थे,
कुश्ती और लाठी में आगे,दुश्मन को मार गिराते थे।

पहले करते थे शांति वार्ता,शत्रु को खूब समझाते थे,
नहीं माने जब बात से वो तो,लातों से भूत मनाते थे।
हरदम करते थे गऊ सेवा वे,गायों को खूब चराते थे,
हर साल वे ददरी जाते,गंगा में खूब नहाते थे।

मजबूरों की मदद करना,उनको बहुत ही भाता था,
जिसको होती जरूरत जैसी,इनके पास वो पाता था।
जल्दी सोना-जल्दी जगना,प्रकृति से इनका नाता था,
उखाड़ कर कोई पौधा लगाते तो,हरा ओ भी हो जाता था।

एक-एक कर के बाग लगाए,बंजर धरा को हरा बनाए,
जो भी देखे दंग रह जाए,बाबूजी ने ऐसे करतब दिखलाए।
कहे ‘उमेश’ हे पितृ देव सुन लो,मैं अब शीश झुकाता हूँ,
आओ मेरे प्यारे मित्रों,दिल की बात बताता हूँ॥

जीवन दान दिया है आपने,मैं गाथा आपकी गाता हूँ,
कार्य आपके अवर्णनीय हैं,चरणों में शीश नवाता हूँ।
पितृ देव की पूजा करो तुम,मैं भी ये रीति अपनाता हूँ,
आओ मेरे प्यारे मित्रों,दिल की बात बताता हूँ॥

कहे ‘उमेश’ कि सुनो हे संतों,तुम भी गाओ मैं गाता हूँ,
पितृ महिमा है अपरम्पार,मैं तो डुबकी भी लगाता हूँ।
सारे काम बन जाते मेरे,बाबूजी का ध्यान लगाता हूँ,
आओ मेरे प्यारे मित्रों,दिल की बात बताता हूँ॥

परिचय–उमेशचन्द यादव की जन्मतिथि २ अगस्त १९८५ और जन्म स्थान चकरा कोल्हुवाँ(वीरपुरा)जिला बलिया है। उत्तर प्रदेश राज्य के निवासी श्री यादव की शैक्षिक योग्यता एम.ए. एवं बी.एड. है। आपका कार्यक्षेत्र-शिक्षण है। आप कविता,लेख एवं कहानी लेखन करते हैं। लेखन का उद्देश्य-सामाजिक जागरूकता फैलाना,हिंदी भाषा का विकास और प्रचार-प्रसार करना है।