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अद्भुत मसीहा निकला

डॉ. कुमारी कुन्दन
पटना(बिहार)
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उत्तर प्रदेश का मुगलसराय,
जनम लिया भारत का लाल
पिता शारदा प्रसाद जिनके,
राम दुलारी के थे छोटे बाल।

निर्धन घर में जनम लिया पर,
बन गया जन-जन का प्यारा
दिल का सहज-सलोना निकला,
वह भारत माँ का राजदुलारा।

कद-काठी छोटी थी उनकी,
पर हृदय था बड़ा विशाल।
साफ-सुथरी छवि के मालिक,
चरित्र अनुकरणीय था मिसाल।

गाँधी के साथी वो ठहरे,
गांधीवादी नीति को अपनाया
रहा सादा जीवन, उच्च विचार,
छल-कपट इन्हें छू ना पाया।

असहयोग और दान्डी मार्च,
में गाँधी को सहयोग दिया
जय-जवान, जय-किसान,
नारे का उदघोष किया।

बड़ा अद्भुत मसीहा निकला
बना मुकद्दर का सिकंदर
प्रधानमंत्री के पद पर बैठा,
देश-प्रेम था जिसके अन्दर।

जम्मू-कश्मीर पर की चढ़ाई,
फिर पाक की शामत आई।
एक-एक को घुसकर मारा,
लाहौर तक कर दी चढ़ाई।

भारत ने जो किया कमाल,
देख विश्व चकित भरमाया।
ताशकंद समझौता कर फिर,
इसने देश का मान बढ़ाया।

पर नियति का खेल निराला,
बुन डाले थे अपनों ने जाल
चिर-निद्रा में चला गया फिर,
अपनी भारत माँ का लाल।

दुनिया सुन स्तब्ध हो गई,
बुरा हुआ परिजन का हाल।
क्या हुआ, और कैसे हुआ ?
आज तक ये रहा मलाल॥