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अपमान…कुछ शेष नहीं

श्रीमती देवंती देवी
धनबाद (झारखंड)
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कुछ शेष नहीं बचा है मन में, मैं भूल गई हूँ सब कुछ,
फिर से क्यों याद दिलाते हो, जब भूल चुकी सब कुछ।

हृदय में प्यार का परिंदा था, जो उड़कर चला गया,
मैं नादान बावरी, के दिल साथ लेकर चला गया।

प्यारा परिंदा, बांध के गया मुझको प्यार की जंजीर से,
क्यों फिर से याद करूँगी, जब मिट गया है तकदीर से।

लिखने वाले विधाता, लिख दिया नसीब अपना-अपना,
कैसे तुझे समझाऊँ, छोड़ दिया हमने देखना सपना।

कर्म प्रधान है जिस बात से, हरेक मानव अनजान है,
पथ तो है पर कंकरीला, काँटों से भरा लगे सुनसान है।

क्यों आते हो बार-बार, गम भरे हृदय में याद दिलाने,
ठोकर खा के टूट चुका है दिल, आना नहीं अब कुरेदने।

दुर्भाग्य है जो सुहागन हो के भी, विधवा जीवन जीती है,
नहीं जान पाएगा जालिम जमाना, क्या दिल पे बीती है

हाथों की हरी-हरी चूड़ियाँ, लग रही है हथकड़ी समान,
कैसे चलूँ कंकरीले पथ पर, यहाँ हर कदम है अपमान॥

परिचय– श्रीमती देवंती देवी का ताल्लुक वर्तमान में स्थाई रुप से झारखण्ड से है,पर जन्म बिहार राज्य में हुआ है। २ अक्टूबर को संसार में आई धनबाद वासी श्रीमती देवंती देवी को हिन्दी-भोजपुरी भाषा का ज्ञान है। मैट्रिक तक शिक्षित होकर सामाजिक कार्यों में सतत सक्रिय हैं। आपने अनेक गाँवों में जाकर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है। दहेज प्रथा रोकने के लिए उसके विरोध में जनसंपर्क करते हुए बहुत जगह प्रौढ़ शिक्षा दी। अनेक महिलाओं को शिक्षित कर चुकी देवंती देवी को कविता,दोहा लिखना अति प्रिय है,तो गीत गाना भी अति प्रिय है |

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