नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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मौसम सितम का हाल है ये,
हर दिन रंग बदलते रहते
कभी प्रचंड ताप, गर्मी बढ़ाता,
कभी रह-रहकर पानी बरसाता
कभी आँधी लाकर मन-मौजीपन करता,
कभी ओले, तो कभी तूफान लाता।
जीना मुहाल हुआ है व्यक्ति का,
गर्मी इतनी बढ़ी कि तापमान ४५ डिग्री जा पहुँचा
लगे जैसे अंगारों पर चल रहे हों,
तापमान बढ़ता ही जा रहा
अब कितने दिन मौसम का यह सितम सहते जाएँ ?
हर जीव गर्म हवाओं से परेशान है,
किसे पता शरीर पर क्या बीत रही है ?
कितना पसीना बह रहा है,
धूल-पसीने से बदन पर जम रही है।
जब पानी बरसता है तो ठंड बढ़ती है,
और लोग घरों में दुबक जाते हैं
जब आँधी चलती है तो धूल आँखों में भर जाती है
ओले पड़ते ही जीव-जंतु सभी परेशान हो जाते हैं,
वृक्ष टूट-टूटकर धरती पर गिरते हैं
सभी पक्षी बेहाल होकर शरण की खोज में भटकते हैं,
मौसम ने अपना सितम बहुत ढाया है।
जब लू चलती है, जीव-जंतु बेहाल हो जाते हैं,
दाने-दाने को तरसकर बेकरार हो जाते हैं
नदी-नाले, कुएँ सूख रहे हैं; पानी के लिए हाहाकार है।
जीव-जंतु, पेड़-पौधे सभी झुलस रहे हैं,
इस मौसम में कोई क्या करे ?
हे कृपा-निधान, सब पर कृपा करें।
कब थमेगा यह सितम इस मौसम का ?