हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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दर्द बहुत है तेरे जाने के बाद,
हर पल दुखों का साया नजर आता है
टूट चुका हूँ मैं इतना, समझ में कुछ नहीं आता है,
अब बस तेरी यादों में ‘आँसू’ बहा लेता हूँ मैं…।
तेरे साथ बीते वह पल भी अजीब थे,
छोटी-छोटी ‘उंगलियों’ को पकड़ कर चलता था
साथी तू मेरा स्वाभिमान ही तो था, जो अब नहीं है,
अब बस तेरी यादों में ‘आँसू’ बहा लेता हूँ…।
छोटे से बड़ा करके में बेफ्रिक हो गया था,
मेरा आत्म-सम्मान सब कुछ, तेरे साथ ही तो था
पर एक आंधी आई और सब ‘तबाह’ कर गई,
अब बस तेरी यादों में ‘आँसू’ बहा लेता हूँ मैं…।
बहुत सपने देखे थे मैंने, मुझे गर्व था तेरे पर,
लेकिन समय के आगे किसी की नहीं चलती है।
यही सच है जीवन का, यह भी अलग रंग हैं, या बदरंग,
अब तो तेरी यादों में ‘आँसू’ बहा लेता हूँ मैं…॥