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आओ हम सौगंध उठाएं

सौदामिनी खरे दामिनी
रायसेन(मध्यप्रदेश)

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आओ हम सौगंध उठाएं,
देश को निर्मल स्वच्छ बनाएं।
सारे पर्यावरण को शुद्ध बनाएं,
घर के कचरे के लिए कूड़ादान बनाएं।
आओ हम सौगंध…

जब भी हम बाजार को जाएं,
साथ में अपना झोला ले जाएं।
प्लास्टिक पोलीथिन से मुक्ति पाएं,
भारत को पोलीथिन मुक्त बनाएं।
आओ हम सौगंध…

देश नदियाँ कल-कल बहती,
पूजन वेल पत्र की सामग्री।
और गंदे अवशेषों को न बहाएं,
इनको निर्मल पावन स्वच्छ बनाएं।
आओ हम सौगंध…

घर के चूल्हे के धुएं से मुक्ति पाएं,
उज्जवला योजना का लाभ उठाएं।
गोबर से गैस बनाएं,
बिजली के बिल से राहत पाएं।
आओ हम सौगंध…

हर पंचायत से एक-एक वाहन भिजवाए,
घर-घर से वह कचरा ले जाए।
सारे कचरे से खाद बनाएं,
पंचायत की आय बढ़ाएं।
आओ हम सौगंध…

बहू-बेटियाँ हैं घर की शान,
फिर बाहर उन्हें क्यों शौच कराएं।
आओ घर-घर शौचालय बनवाएं,
शौचालय का उपयोग कराएं।
आओ हम सौगंध…

आओ हम सौगंध उठाएं,
देश को निर्मल स्वच्छ बनाएं॥

परिचय-सौदामिनी खरे का साहित्यिक उपनाम-दामिनी हैl जन्म-२५ अगस्त १९६३ में रायसेन में हुआ हैl वर्तमान में जिला रायसेन(मप्र)में निवासरत सौदामिनी खरे ने स्नातक और डी.एड. की शिक्षा हासिल की हैl व्यवसाय-कार्यक्षेत्र में शासकीय शिक्षक(सहायक अध्यापक) हैंl आपकी लेखन विधा-गीत,दोहा, ग़ज़ल,सवैया और कहानी है। ब्लॉग पर भी लेखन में सक्रिय दामिनी की लेखनी का उद्देश्य-लेखन कार्य में नाम कमाना है।इनके लिए प्रेरणापुन्ज-श्री प्रभुदयाल खरे(गज्जे भैया,कवि और मामाजी)हैंl भाषा ज्ञान-हिन्दी का है,तो रुचि-संगीत में है।