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आसानी से न मिली आज़ादी

एस.अनंतकृष्णन
चेन्नई (तमिलनाडु)
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विदेश का थप्पड़,
विदेश में शुरू
सत्याग्रह का महत्व,
सारे जहां में माननीय।

नरम दल और गरम दल का आंदोलन,
अहिंसात्मक लड़ाई
जालियाँवाला बाग का निर्दयी हत्याकांड,
फाँसी की सजा।

भारतीय द्रोही,
वेतन भोगी लोग
देश के लिए कलंक,
भारतीयों ने भारतीयों को मारा
मुट्ठीभर के अंग्रेज़ी
ऐसे देशद्रोही न बनो।

संकल्प लो-देश ही प्रधान,
एकता में है ताकत
राष्ट्रीय शिक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा,
कश्मीर में हो या कन्याकुमारी
प्रारंभिक कक्षा से स्नातकोत्तर तक।
भारतीय एकता, देश भक्ति,
संस्कृति, राष्ट्रीयता, अनुशासन हो प्रधान॥

परिचय –एस.अनंतकृष्णन तमिलभाषी होकर भी तमिलनाडु में हिंदी प्रचारक हैं। आपकी शैक्षणिक योग्यता एम.ए. (हिंदी) और एम.एड. है। अवकाश प्राप्त प्रधान अध्यापक होकर आप चेन्नै में हिंदी प्रचारक, शिक्षा महाविद्यालय में प्राध्यापक सहित दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा (चेन्नै) से भी जुड़े रहे हैं। स्वतंत्र लेखक के रूप में आप सामाजिक मीडिया माध्यमों में सक्रिय हैं। आपकी रचनाएँ कई पत्र-पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हैं। आपको हिंदी साहित्य संस्थान (लखनऊ) से सौहार्द सम्मान २०२१, कबीर कोहिनर सम्मान, जिला शिक्षा अधिकारी, तमिलनाडु हिंदी अकादमी, हिंदी साहित्य अकादमी (मुम्बई), साहित्य भूषण, साहित्य भास्कर और श्रेष्ठ रचनाकार सहित ५० से अधिक सम्मान मिल चुके हैं। आप राज्य की जनता को राष्ट्रहित के लिए हिंदी सिखाते हैं।