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आ रहे हैं राम

श्रीमती देवंती देवी
धनबाद (झारखंड)
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‘आ रहे हैं राम’-
छतों की मुंडेर पर आज, बोल रहा है कागा,
पधार रहे हैं श्रीराम, अवध का भाग्य जागा।

‘आ रहे हैं श्रीराम’-
कमल नयन वाले, साधु-सन्त के रखवाले,
मधुर मुस्कान वाले, भक्तों को चाहने वाले।

‘आ रहे हैं राम’-
राम जी के संग में हैं, देवी सीता मैया,
धनुष बाण सम्हाले हैं, छोटे लक्ष्मण भैया।

‘आ रहे हैं श्रीराम’-
सूखी-सूखी बगिया में, पंखुड़ी खिलने लगी है।
सीता जी की बहना भी, गले मिलने लगी है।

‘आ गए हैं श्रीराम’-
आतुर हैं माता गंगा, श्रीराम के पग धोने को,
आस लगाए बैठे हैं सेवक, चरणामृत पीने को।

‘आ रहे हैं श्रीराम’-
वेद मंत्र पढ़ रहे हैं गुरु-पुरोहित, आगमन को,
सहस्त्र स्वीकार किए राम, भक्तों के नमन को।

‘आ रहे हैं श्रीराम’-
अवध समेत भारत में, जयकारा हो रहा है,
अपनी भाषा में हर कोई, मंगल गीत गा रहा है।

‘आ रहे हैं श्रीराम’-
कौशल्या के पुत्र दुलारे, अवध में पधार रहे हैं,
छोटे-छोटे भाई, राम जी के चरण पखार रहे हैं॥

परिचय– श्रीमती देवंती देवी का ताल्लुक वर्तमान में स्थाई रुप से झारखण्ड से है,पर जन्म बिहार राज्य में हुआ है। २ अक्टूबर को संसार में आई धनबाद वासी श्रीमती देवंती देवी को हिन्दी-भोजपुरी भाषा का ज्ञान है। मैट्रिक तक शिक्षित होकर सामाजिक कार्यों में सतत सक्रिय हैं। आपने अनेक गाँवों में जाकर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है। दहेज प्रथा रोकने के लिए उसके विरोध में जनसंपर्क करते हुए बहुत जगह प्रौढ़ शिक्षा दी। अनेक महिलाओं को शिक्षित कर चुकी देवंती देवी को कविता,दोहा लिखना अति प्रिय है,तो गीत गाना भी अति प्रिय है |