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इतना बड़ा झूठ

डोली शाह
हैलाकंदी (असम)
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माता-पिता ने बेटी महक की शादी शरीफ़ से करने का फैसला कर लिया, परन्तु परीक्षा निकट होने के कारण विवाह तिथि तय नहीं हो सकी।
अचानक एक दिन महक की सोशल मीडिया पर शौर्य से मुलाकात हुई। धीरे-धीरे घनिष्टता ने प्यार की शाल ओढ़ ली। दोनों घंटों परस्पर प्यार में डूबे रहते। शौर्य ने अपने परिचय में खुद को दिल्ली की एक फैक्ट्री में इंजीनियर बताया। उसके व्यक्तित्व और पद से प्रभावित होकर महक उससे शादी के लिए तैयार हो गई।
फिर अचानक एक दिन कॉलेज के प्रोजेक्ट के काम से महक को दिल्ली जाना पड़ा। काम से निपट कर वह शौर्य से मिलने उसके बताए पते पर फैक्ट्री चली गई। गेट-कीपर से शौर्य को बुलाने का अनुरोध करने पर गेट-कीपर सोच में पड़ गया! फिर बोला-“मैडम, आपने क्या नाम बताया ?”
“शौर्य खन्ना!”
“सॉरी मैडम!, इस नाम का इस कंपनी में कोई इंजीनियर नहीं है।”
महक ने पर्स से शौर्य की फोटो निकाल कर उसे दिखाते हुए पूछा-“क्या आप इन्हें पहचानते हैं ?”
“हाँ मैडम!, यह तो इस कंपनी के
इलेक्ट्रीशियन हैं।”
“क्या आप सच कह रहे हैं ?”
“हाँ मैडम!, मुझे झूठ बोलकर क्या मिलेगा ?”
महक कुछ देर सोचती रही, फिर खुद को सँभालती हुई बोली- “क्या आप उन्हें बुला देंगे ?”
“जी जरूर,! थोड़ी प्रतीक्षा कीजिए।”
गेट-कीपर ने कॉल कर शौर्य को बाहर बुला लिया। जैसे ही शौर्य की नजर महक पर पड़ी, वह सकपकाते हुए बोल पड़ा,-“तुम यहाँ! अचानक ? मुझे बुला लिया होता ? तुमने आने का कष्ट क्यों किया ?”
महक ने कहा,-“नहीं, कुछ काम से दिल्ली आना हुआ था। सोचा, तुमको सरप्राइज दे दूँ ! क्यों, क्या मुझे यहां नहीं आना चाहिए था ?
“नहीं नहीं! ऐसी कोई बात नहीं। आओ चलो, लंच का समय हो गया है, किसी होटल में बैठकर बातें करते हैं, और साथ ही लंच भी।”
महक ने कहा-“क्या अपना आफिस नहीं दिखाओगे ?”
फिर पलट कर बोली,-“हाँ! तुम्हारा तो कोई ऑफिस है ही नहीं, तो होटल में ही ले जाना पड़ेगा।”
शौर्य कुछ घबराया हुआ-सा महक को देखते हुए बोला,-“तुम ऐसे क्यों बोल रही हो ?
महक बोली,-“मत छुपाओ शौर्य अब कुछ भी। मुझे तुम्हारी सारी सच्चाई पता चल चुकी है, लेकिन दोस्ती में कोई इतना बड़ा झूठ बोल सकता है, सचमुच यकीन नहीं होता।”
…वह समझाते हुए बोला,-“ऐसा कुछ नहीं है, मैं तुम्हें बताना चाहता था, लेकिन कभी मौका ही नहीं मिला।”
“शौर्य!, बस अब और झूठ मत बोलो! तुम जैसे लोगों के कारण ही इंसान का विश्वास खत्म होता जा रहा है।” इतना कहकर महक लौटने लगी।
“सुनो तो मेरी बात!”
“नहीं! अब कुछ नहीं सुनना। हमारा रिश्ता आज से खत्म। फिर कभी मिलने की कोशिश भी मत करना।”

महक घर आकर घंटों रोई। धीरे-धीरे खुद को सँभालते हुए शौर्य को भूलकर शरीफ से विवाह कर के नई जिन्दगी की डगर पर चल पड़ी…।

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