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इश्क़ कभी न मरेगा

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’
अलवर(राजस्थान)
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इश्क़ कभी मरा है न मरेगा,
दो रुह का मिलन है सदा रहेगा
सागर की लहरों को कोई,
रोक सका न रोक पाया है।

इश्क़ हवा का झोंका है,
एक दिन उड़ा ले जाएगा
उठते तूफां को कोई,
रोक सका न रोक पाया है।

इश्क़ सावन का काला बादल,
उमड़-घुमड़ कर बरसेगा
आकाश की बिजली को कोई,
रोक सका न रोक पाया है।

इश्क़ खिलता हुआ गुलाब है,
आँगन-आँगन महकेगा
हवाओं के झोंकों को कोई,
रोक सका न रोक पाया है।

इश्क़ जलता हुआ चिराग है,
दिल का अंधेरा मिट जाएगा
सूर्य के प्रकाश को कोई,
रोक सका न रोक पाया है।

इश्क़ भावों का गहरा समुद्र,
सबको गले लगाएगा।
मर्म से निकले आँसू कोई,
रोक सका न रोक पाया है॥

परिचय- ताराचंद वर्मा का निवास अलवर (राजस्थान) में है। साहित्यिक क्षेत्र में ‘डाबला’ उपनाम से प्रसिद्ध श्री वर्मा पेशे से शिक्षक हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कहानी,कविताएं एवं आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आप सतत लेखन में सक्रिय हैं।