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एक कदम चल….

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’
बूंदी (राजस्थान)
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(रचना शिल्प:इस पद्य में ‘अ’ के अलावा कहीं भी ‘अन्य स्वर की मात्रा’ का उपयोग नहीं किया गया है।)

चल,एक कदम,एक कदम,एक कदम चल,
जम-जम कर,रख कदम कर अब पहल।
रतन बन चम-चम चमक कर उजल,
नकल अब तजन कर,कर सब असल।
रत जब करम पथ,पथ सब नवल,
थक कर शयन,सब फल गए गल।
चल,एक कदम,एक कदम,एक कदम चल,
जम-जम कर रख कदम,कर अब पहल॥

कण-कण खनन,जब कर-कर खरल,
कर कर गहन जतन,तब बन सफल।
नयन भर सपन,कर फतह महल,
श्रमकण बरसत,तब उपजत फसल।
चल,एक कदम,एक कदम,एक कदम चल,
जम-जम कर रख कदम,कर अब पहल॥

भर-भर जब जल बहत जय जय तब कल,
जलद घन बरसन,नदयन भर पल।
अचरज सब करत सकत,नजरन बदल,
नजर भर दरशन,यह सब जग मचल।
चल,एक कदम,एक कदम,एक कदम चल,
जम-जम कर रख कदम,कर अब पहल॥

श्रमकण जब चमकत,तब भगवन सरल,
जतन जब करतन,करतल सब फल।
अमर पद पकड़न,हजम कर गरल,
दम पर करम (कर्म),अब करम(भाग्य) बदल।
चल,एक कदम,एक कदम,एक कदम चल,
जम-जम कर रख कदम,कर अब पहल॥
(इक दृष्टि यहाँ भी:श्रमकण=पसीना,कल=झरना,गरल=जहर, करतल=हाथ)

परिचय–आप लेखन क्षेत्र में डी.कुमार’अजस्र’ के नाम से पहचाने जाते हैं। दुर्गेश कुमार मेघवाल की जन्मतिथि-१७ मई १९७७ तथा जन्म स्थान-बूंदी (राजस्थान) है। आप राजस्थान के बूंदी शहर में इंद्रा कॉलोनी में बसे हुए हैं। हिन्दी में स्नातकोत्तर तक शिक्षा लेने के बाद शिक्षा को कार्यक्षेत्र बना रखा है। सामाजिक क्षेत्र में आप शिक्षक के रुप में जागरूकता फैलाते हैं। लेखन विधा-काव्य और आलेख है,और इसके ज़रिए ही सामाजिक मीडिया पर सक्रिय हैं।आपके लेखन का उद्देश्य-नागरी लिपि की सेवा,मन की सन्तुष्टि,यश प्राप्ति और हो सके तो अर्थ प्राप्ति भी है। २०१८ में श्री मेघवाल की रचना का प्रकाशन साझा काव्य संग्रह में हुआ है। आपकी लेखनी को बाबू बालमुकुंद गुप्त साहित्य सेवा सम्मान-२०१७ सहित अन्य से सम्मानित किया गया है|