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कड़वी चाय

डॉ.चंद्रदत्त शर्मा ‘चंद्रकवि’
रोहतक (हरियाणा)
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“ये फौजी साहब भी महान हैं,इन्हीं के भरोसे हम सब चैन की नींद सोते हैं।” लोकल ट्रेन की सीट पर ताश बांटते हुए रमेश ने कृतज्ञता प्रकट की।
“अरे बांट ना यार ताश!” बीच में टोकते हुए खेल के प्रतिभागी नवीन ने कहा।
बेचारा फौजी सामान के साथ चुपचाप खड़ा रहा। उसे लगा देश हमारी इज्जत तो करता है,पर त्याग भाव नहीं। तभी चाय वाले का प्रवेश होता है ‘चाय-चाय’ पुकारता है। फौजी सत्यवान ने पूछा,-“भाई,चाय देना.. कितने में देते हो ?”
“१० ₹ में साब।” चाय वाले ने कहा।
“पर आज ही ५ में मिली थी।” फौजी साहब ने थोड़ी बात रखी। चाय की जैसे ही घूंट भरी,उसे कड़वी लगी। उसके मन में तो ताश वालों की आराम से बैठकर बाजी चल रही थी,ऊपर से फौजी को देखकर चाय वाले का दोगुने दाम का विचार था।

परिचय–डॉ.चंद्रदत्त शर्मा का साहित्यिक नाम `चंद्रकवि` हैl जन्मतारीख २२ अप्रैल १९७३ हैl आपकी शिक्षा-एम.फिल. तथा पी.एच.डी.(हिंदी) हैl इनका व्यवसाय यानी कार्य क्षेत्र हिंदी प्राध्यापक का हैl स्थाई पता-गांव ब्राह्मणवास जिला रोहतक (हरियाणा) हैl डॉ.शर्मा की रचनाएं यू-ट्यूब पर भी हैं तो १० पुस्तक प्रकाशन आपके नाम हैl कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचना प्रकाशित हुई हैंl आप रोहतक सहित अन्य में भी करीब २० साहित्यिक मंचों से जुड़े हुए हैंl इनको २३ प्रमुख पुरस्कार मिले हैं,जिसमें प्रज्ञा सम्मान,श्रीराम कृष्ण कला संगम, साहित्य सोम,सहित्य मित्र,सहित्यश्री,समाज सारथी राष्ट्रीय स्तर सम्मान और लघुकथा अनुसन्धान पुरस्कार आदि हैl आप ९ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल हो चुके हैं। हिसार दूरदर्शन पर रचनाओं का प्रसारण हो चुका है तो आपने ६० साहित्यकारों को सम्मानित भी किया है। इसके अलावा १० बार रक्तदान कर चुके हैं।