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कथा-मणि साहित्य-शिरोमणि

विजय मेहंदी
जौनपुर(उत्तरप्रदेश)
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जननी माँ आनन्दी जी,
जनक अजायब के घर-परिवार।

ईस्वी अठारह सौ अस्सी में,
इक्कतीस जुलाई रहा तिथि वार।

जिला बनारस शिव की नगरी,
लमही गाँव के एक वृहद परिवार।

युग प्रसिद्ध अद्वितीय कलमकार,
मुंशी प्रेमचंद लिए थे अवतार।

धनपत राय नाम था पहला उनका,
मुंशी प्रेमचंद हुआ दूसरी बार।

मैट्रिक पास हुए ही थे वे,
तब तक मिला शिक्षक पदभार।

फिर वे पास हुए बी.ए. तब,
डिप्टी साहब का मिला पदभार।

साथ ही साथ लेखनी उनकी,
पकड चुकी थी खूब रफ्तार।

‘पूस की रात’, ‘गुल्ली डंडा’, ‘ईदगाह’,
जैसी प्रिय कहानियों के कलमकार।

‘गबन’,’गोदान’, ‘निर्मला’ जैसे निर्मल,
उपन्यासों में रहा ‘जलवा-ए-निसार’।

गाँव की बोली भाषाओं युक्त,
कृतियाँ आपकी हुईं लोकप्रिय अपार।

आप रहे एक कलम के सिपाही,
कलम में आपके रही अहिंसक धार।

आमजनों के जीवन वर्णन में,
देशी बोली भाषाओं का रहा शुमार।

अन्त समय खुद ‘कफन’ सृजन कर,
कफन से लिपट गया महाकथाकार।

नाम तुम्हारा अजर-अमर रहेगा,
याद रखेगा सदा यह साहित्य-संसार॥

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