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कन्या भोज

जितेंद्र शिवहरे
इन्दौर(मध्य प्रदेश)
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चौधरी परिवार कन्या पूजन संपूर्ण मनोयोग और पूरे विधि-विधान से कर रहा था। चैत्र नवरात्र की नवमीं पर कन्या भोज की सभी तैयारी पूरी हो चुकी थी। चौधराईन ने द्वार पर आई कन्याओं को एक-एक कर गिन लिया। पूरी नौ कन्याएं थी। चौधराईन ने माताजी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए सभी कन्याओं के पाद
पूजन कर भोजन कक्ष में बैठाना शुरू किया। चौधराईन कन्याओं के पैर धोकर उन्हें अन्दर बैठने का निर्देश दे रही थी,जबकि चौधरी जी कन्याओं के आगे भोजन की थाली परोस रहे थे। आँगन में खड़े पड़ोस में रहने वाले नन्हें लड़के अपने लड़का होने के कारण चौधरी जी के घर में भोजन के भोग हेतु प्रवेश पाने के लिए प्रतिबंधित थे। आत्मशोक में डूबे वे बहुत मायूस थे,तभी चौधरी जी का दस वर्षीय बेटा टप्पू दौड़ते हुए आँगन में आया और अपनी माँ से बोला-“मम्मी! शर्मा अंकल की दुकान के पास एक लड़की अपनी गोदी में एक बच्चे को लेकर बैठी थी। शर्मा जी उसे वहां से चले जाने का कह रहे थे,और डांट भी रहे थे। वह बेचारी भूखी थी। आपने कहा था न कि कन्या भोजन के लिए आसपास की कन्याओं को मैं बुला कर ले लाऊं ? तो मैं उस लड़की को भी ले आया। आप उसे भी भोजन करा दो!”
अपने बेटे की मासूमियत और बड़ा हृदय देखकर चौधराईन और चौधरी जी का हृदय द्रवित हो उठा। टप्पू को प्यार से दुलारते हुए चौधराईन ने बाहर खड़ी उस लड़की को आँगन में बुलाया। उस लड़की की गोद में एक नन्हीं कन्या जो चौधराईन को देख-देख निरन्तर मुस्कुराए जा रही थी,को चौधराईन ने अपनी गोद में ले लिया। चौधरी जी ने उन दोनों कन्याओं के भी पांव धोकर संग्रहित जल का घर में छिड़काव किया। आँगन के बाहर बांट जोह रहे नन्हे लड़के भी चौधरी जी का अन्दर आ जाने का इशारा पाकर दौड़ते-भागते अन्दर आ गये।
चौधरी परिवार को कन्या भोज करवाकर जितना आनंद आज आया,उतना पूर्व में कभी नहीं आया। भोजन हेतु कन्याओं की संख्या निर्धारण और छोटे लड़कों को कन्या भोज में सम्मिलित नहीं करने की वर्षों पुरानी परम्परा चौधरी परिवार ने आज तोड़ दी थी। सभी बच्चों ने मिलकर प्रसन्नता के साथ भोजन ग्रहण किया। बच्चों की यह आत्मसंतुष्टि चौधरी परिवार को कन्या भोज का वास्तविक संदेश दे गई।

परिचय-जितेंद्र शिवहरे की जन्म तारीख १७ जुलाई १९८४ और जन्म स्थान-इंदौर है। वर्तमान में इन्दौर(मध्य प्रदेश) में बसे हुए हैं। आपकी शिक्षा एम.ए.(संस्कृत) है। कार्यक्षेत्र में सहायक अध्यापक (नौकरी) के तौर पर कार्यरत श्री शिवहरे सामाजिक गतिविधि में काव्य गोष्ठियों में सहभागिता करते हैं। इनकी लेखन विधा-गीत,गज़ल और कथा है। लेखनी का उद्देश्य-समाजसेवा है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-साहित्य ही है। भाषा ज्ञान-हिन्दी का है,तो रुचि-लेखन में ही है।