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कविता को कविता रहने दो

डॉ.अशोक
पटना(बिहार)
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यह कवि के हृदय स्वर से,
निकली काव्यात्मक रचना है
बन्दिशों से मुक्त है,
श्रद्धा युक्त संरचना है।

अन्तर्मन की व्यथा है,
तो फिर यह
क्यों बंधनों में बंधी रहे यहां,
कविता मुक्त हो
आजादी का मातृत्व रहे,
इसलिए लफ्जों में खुशहाली लाने को
कविता की पुकार सदैव,
लोगों का स्वर बनती रहे यहां।

कविता मन के अन्दर,
समाहित प्यार की अनुभूति
हरपल दिखती है यहां,
मनोभाव का स्वर है
प्यार और स्नेह की,
सुन्दर प्रस्तुति बनी
हरक्षण दिखती रहती है यहां।

धारा बनकर वेदनापूर्ण,
सागर के कष्टों को
उत्कृष्ट सुन्दर विचार भाव नीति से,
मन की अनुभूति बनकर
शिष्ट सौंदर्य संग,
मन के हृदय तल में बसी हुई
बनी सुन्दर मनोरम कविता,
हृदय पुष्प को सदैव,
तृप्त करती दिखती रहती है यहां
यह बन्धन नहीं चाहती है,
मुक्त स्वच्छंद विचरण,
दिल से है चाहती है यहां।

प्रपंचों से मुक्त हो,
जन सम्पदा प्रभुत्व बनाए रखने में
सदैव लिप्त हो,
ज़िन्दगी की रफ्तार बने
संयुक्ता स्नेहिल भाव सुने,
कविता कोश में
प्यार और स्नेह रहे।

यही है कविता की,
आज की बड़ी चाहत यहां
दिल से उमंग भरें,
मन प्रफुल्लित रहें यहां।

ईर्ष्या और क्लेश में,
नहीं कभी रक्त बहे
संयुक्त उद्यम संग,
कविता संग एकता की बात हो
कविता संवेदना संसार है,
मित्रता और अपनत्व का
सुन्दर स्वाभाव हो।

उन्नति-प्रगति की,
कविता शिल्पकार है
संयुक्त उद्यम संग,
मिल-जुलकर रहने का
सर्वोत्तम उपहार है।

आओ हम-सब मिलकर कहें,
कविता आज संवेदना संसार बनें यहां
राजनीतिक कुचक्र से,
कविता सदैव अब मुक्त रहे यहां
आजादी और गणतंत्रता में,
कविता की उन्मुक्त की
आज़ एक प्रथा बने,
यह सुन्दर उत्तम उपचार है
सम्पन्नता का सागर दिखे यहां।

कविता कोश वृहद संसार है,
हृदय पुष्प का संस्कार है
उन्नति प्रगति और विकास का,
सुन्दर प्रस्तुति संग अद्भुत अवतार है।

बन्धन मुक्त राज चले,
कविता की आवाज दिखे
सांस्कृतिक विरासत में,
कविता का संसार हो
पराधीनता और परतंत्रता का,
कभी नहीं उद्गार हो
उन्नत संस्कार संग,
शान्ति का प्रभाव हो।
कविता संवेदना को परिष्कृत किया जाएं यहां,
सांस्कृतिक विरासत में कविता स्थान पाएं यहां॥

परिचय-पटना(बिहार) में निवासरत डॉ.अशोक कुमार शर्मा कविता,लेख,लघुकथा व बाल कहानी लिखते हैं। आप डॉ.अशोक के नाम से रचना कर्म में सक्रिय हैं। शिक्षा एम.काम.,एम.ए.(राजनीति शास्त्र,अर्थशास्त्र, हिंदी,इतिहास,लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास) सहित एलएलबी,एलएलएम,सीएआईआईबी, एमबीए व पीएच-डी.(रांची) है। अपर आयुक्त (प्रशासन)पद से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा द्वारा लिखित अनेक लघुकथा और कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं,जिसमें-क्षितिज,गुलदस्ता, रजनीगंधा (लघुकथा संग्रह) आदि है। अमलतास,शेफालीका,गुलमोहर, चंद्रमलिका,नीलकमल एवं अपराजिता (लघुकथा संग्रह) आदि प्रकाशन में है। ऐसे ही ५ बाल कहानी (पक्षियों की एकता की शक्ति,चिंटू लोमड़ी की चालाकी एवं रियान कौवा की झूठी चाल आदि) प्रकाशित हो चुकी है। आपने सम्मान के रूप में अंतराष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच द्वारा काव्य क्षेत्र में तीसरा,लेखन क्षेत्र में प्रथम,पांचवां,आठवां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।

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