कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,
हैदराबाद (तेलंगाना)
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आज भी इंतजार तेरा,
करता रहा बाजार मेरा
तेरे दर्शन के लिए,
अंधेरी रातों में, आंधी-तूफ़ानों में
भीगता रहा तेरी यादों की रवानी में,
साँसें छोड़ूं, आँखें मूंदूं तेरी प्रतीक्षा में।
हर गुजरते पल ने मुझसे
तेरा ही पता पूछा है,
हर धड़कन ने चुपके-चुपके
तेरा नाम ही तो जपा है।
चाँद भी मेरी तन्हाई का
साक्षी बनकर रोता है,
तारों की महफ़िल में भी
दिल तेरा ही सपना संजोता है।
राहों में बिछी हैं आँखें,
मन ने दीप जलाए हैं
तेरे आने की आशा में,
कितने मौसम बिताए हैं।
कभी हवा बनकर आ जाना,
कभी खुशबू बनकर छा जाना
मेरी सूनी-सी दुनिया में
प्रेम का मधुर गीत सुना जाना।
जब तक साँसों का संग रहेगा,
तेरा इंतजार रंग रहेगा।
जीवन की अंतिम बेला तक,
मेरा हृदय तेरा ही अंग रहेगा॥
परिचय – कवि व अनुवादक कमलेकर नागेश्वर राव का साहित्यिक उपनाम ‘कमल’ है। आप सरकारी अध्यापक (हिंदी) ने रूप में जिला नागर कर्नूल के वेल्दंडा में कार्यरत हैं। तेलंगाना राज्य के रंगा रेड्डी जिले में निवासरत ‘कमल’ की तेलुगू और हिंदी के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ व विशेष आलेख प्रकाशित होते रहते हैं। इनको श्री श्री कला वेदिका राजमंड्री वालों से ‘साहिती मित्रा’ पुरस्कार, आदित्य संस्कृति (मप्र) से ‘हिंदी सेवी’ तथा डाॅ.सीता किशोर खरे स्मारक साहित्य पुरस्कार आदि मिले हैं।