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देशभक्त थे कॉमरेड ए.के. राय

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’
धनबाद (झारखंड )
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कामगारों के मसीहा थे कॉमरेड ए.के. राय,
रासायनिक अभियंता थे कॉमरेड ए.के. राय
सिंदरी के जनप्रिय विधायक थे ए.के. राय, 
धनबाद के लोकप्रिय सांसद थे ए.के. राय
जन-जन को समर्पित नेता थे ए.के. राय।

विनम्र, मृदुभाषी, सरल-सहज थे ए.के. राय, 
शख्स व शख्सियत में अव्वल थे ए.के. राय
सादगी प्रतिमूर्ति, सर्वहारा के तारा थे राय, 
मार्क्स, विवेकानंद, गाँधी का दर्शन थे राय
झारखंड की प्रेरणा एवं संकल्पना थे राय।

माता रेणुका व पिता थे एड. शिवेश चंद्र राय, 
पूर्वी बंगाल के सपुरा ग्राम में जन्मे ए.के. राय
कोलकाता के प्रसिद्ध अधिवक्ता थे पिता राय, 
माता प्रखर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रेणुका राय
कोलकाता में ही इंजीनियरिंग शिक्षा पाए राय।

भारतीय उर्वरक निगम सिंदरी में नौकरी पाए राय, 
सर्वहारा चिंतक विचारक को मजदूर शोषण न भाये
उनकी सेवा की खातिर सिंदरी की राजनीति अपनाए,
नौकरी त्याग मार्क्सवादी कॉम्युनिस्ट में आए ए.के. राय
तीन बार सिंदरी से विधायकी जीत गए ए.के. राय।   

१९७६ में इंदिरा के ‘आपातकाल’ में जेल गए राय, 
हजारीबाग केंद्रीय कारा में भेजे गए कॉमरेड राय
जेल में जॉर्ज फर्नांडीस की मित्रता पाए ए.के. राय, 
सत्तहत्तर की ललकार से धनबाद सांसद बने राय
अभूतपूर्व मतों से विजय पाई कॉमरेड ए.के. राय।

सत्यवादी हरिश्चंद्र का दर्जा पाए कॉमरेड ए.के.राय, 
सिंदरी खाद, कोयला खान मजदूरों की धड़कन बने राय
बोकारो इस्पात के मजदूरों की आवाज थे राय, 
धनबाद लोकसभा क्षेत्र के सर्वहारा संघर्ष वाहक थे राय
मजदूरों-किसानों की प्रेरणा व मुखर आवाज थे ए.के. राय।

विधायक व सांसद की पेंशन राष्ट्रपति को लौटाए राय,
संसद में सांसद विधायक पेंशन रोक की माँग उठाए राय
स्वयं के मत व सहमति से सत्ता पक्ष को सेवा सिखाई राय,
‘सांसद को पेंशन बंद हो’ आपकी मांग, सारे चुप हो जाय
जन प्रतिनिधियों को लताड़कर आईना दिखाए राय। 

सिंदरी अमोनियम सल्फेट प्लांट बेचने पर गर्माए राय,
केंद्र सरकार को स्वयं चलाने की चुनौती दे आए राय
संघर्ष-आंदोलन के बाद एफ.सी.आई. बचा न पाए राय,
बोकारो स्टील के अप्रेंटिसशिप युवकों को नौकरी दिलाए राय
कोयला कामगारों को सम्मान, विस्थापितों को नौकरी दिलाए राय।

पुराना बाजार धनबाद की झोपड़ी को कार्यालय बनाए,
जनप्रतिनिधि कैसा हो? उसकी दिशा और दशा दिखाए
जनहित में काम कैसे ? जन को पैग़ाम क्या कैसे बताए
दर्द है आधुनिक राजनेता आपके विचार नहीं अपनाए
कामरेड ए.के. राय के काम व सपने को कौन आगे बढ़ाए ? 

त्याग, तपस्या, सर्वहारा संघर्ष की मिसाल थे ए.के. राय, 
बेसहारा, गरीब, गुरबा, कामगारों की मशाल थे ए.के. राय
निःस्वार्थ, परमार्थ, लोकार्थ हृदय के विशाल थे ए.के. राय, 
आदमी या मानुष रूप में कलयुगी भगवान् थे ए.के. राय
झारखंड के भाल, तीर धनुष बेमिसाल थे अरुण कुमार राय।

मार्क्सवादी चिंतक, विचारक, लेखक, प्रेरक कॉमरेड राय, 
शोध-अनुसंधान के व्यक्तित्व हैं कॉमरेड ए.के. राय, 
सर्वहारा विकास की आहुति में सर्वस्व होम हुए ए.के. राय।
काश! धनबाद में कोई तो उनकी कार्यशैली अपनाए,
‘न भूतो न भविष्यते’ नेता ऐसे थे कामरेड ए.के. राय॥

परिचय-सिंदरी (धनबाद, झारखंड) में १४ दिसम्बर १९६४ को जन्मे आचार्य संजय सिंह का वर्तमान बसेरा सबलपुर (धनबाद) और स्थाई बक्सर (बिहार) में है। लेखन में ‘चन्दन’ नाम से पहचान रखने वाले संजय सिंह को भोजपुरी, संस्कृत, हिन्दी, खोरठा, बांग्ला, बनारसी सहित अंग्रेजी भाषा का भी ज्ञान है। इनकी शिक्षा-बीएस-सी, एमबीए (पावर प्रबंधन), डिप्लोमा (इलेक्ट्रिकल) व नेशनल अप्रेंटिसशिप (इंस्ट्रूमेंटेशन डिसिप्लिन) है। अवकाश प्राप्त (महाप्रबंधक) होकर आप सामाजिक कार्यकर्ता व रक्तदाता हैं तो साहित्यिक गतिविधि में भी सक्रियता से राष्ट्रीय संस्थापक-सामाजिक साहित्यिक जागरुकता मंच मुंबई (पंजी.), संस्थापक-संरक्षक-तानराज संगीत विद्यापीठ (नोएडा) एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता के.सी.एन. क्लब (मुम्बई) सहित अन्य संस्थाओं से बतौर पदाधिकारी जुड़े हैं, साथ ही पत्रकारिता का वर्षों का अनुभव है। आपकी लेखन विधा-गीत, कविता, कहानी, लघु कथा व लेख है। बहुत-सी रचनाएँ पत्र-पत्रिका में प्रकाशित हैं, साथ ही रचनाएँ ४ साझा संग्रह में हैं। ‘स्वर संग्राम’ (५१ कविताएँ) पुस्तक भी प्रकाशित है। सम्मान-पुरस्कार में आपको महात्मा बुद्ध सम्मान-२०२३, शब्द श्री सम्मान-२०२३, पर्यावरण रक्षक सम्मान-२०२३, श्रेष्ठ कवि सम्मान-२०२३ सहित अन्य मिले हैं तो विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में कई बार उपस्थिति, देश के नामचीन स्मृति शेष कवियों (मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र आदि) के जन्म स्थान जाकर उनकी पांडुलिपि अंश प्राप्त करना है। श्री सिंह की लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी भाषा का उत्थान, राष्ट्रीय विचारों को जगाना, हिन्दी भाषा, राष्ट्र भाषा के साथ वास्तविक राजभाषा का दर्जा पाए, गरीबों की वेदना, संवेदना और अन्याय व भ्रष्टाचार पर प्रहार करना है। मुंशी प्रेमचंद, अटल बिहारी वाजपेयी, जयशंकर प्रसाद, भारतेंदु हरिश्चंद्र, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, किशन चंदर और पं. दीनदयाल उपाध्याय को पसंदीदा हिन्दी लेखक मानने वाले ‘चंदन’ के लिए प्रेरणापुंज-पूज्य पिता जी, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, महात्मा गॉंधी, भगत सिंह, लोकनायक जय प्रकाश, बाला साहेब ठाकरे और डॉ. हेडगेवार हैं। आपकी विशेषज्ञता-साहित्य (काव्य), मंच संचालन और वक्ता की है। जीवन लक्ष्य-ईमानदारी, राष्ट्र भक्ति, अन्याय पर हर स्तर से प्रहार है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-“अपने ही देश में पराई है हिन्दी, अंग्रेजी से अंतिम लड़ाई है हिन्दी, अंग्रेजी ने तलवे दबाई है हिन्दी, मेरे ही दिल की अंगड़ाई है हिन्दी।”