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कहते अमृत आजादी को

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

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७५ बरस की आजादी का अमृत और हम सपर्धा विशेष….

पचहत्तर वर्षों से वादी।
में है भारत की आजादी॥
अमृत का मंथन कर लाये।
प्राण लुटा कर अपने आये॥

थी वर्षों की बनी गुलामी।
अपमानों की हुई सलामी॥
जालिम बने रहे सब शासक।
मानवता के थे वो नाशक॥

राज किया मुगलों ने पहले।
शासक ब्रिटिश बने थे अगले॥
जुल्म वही थे जालिम बदले।
प्राण बहुत थे सबने निगले॥

दैत्य सभी उनमें होते थे।
देव हमारे एक बहुत थे॥
भोग रहे हम देन उन्हीं की।
मोहक बनी जिन्दगी सबकी॥

भारत का हर दिन उजियारा।
सजता पल-पल हर पखवारा॥
माटी में सौंधी-सी खुशबू।
जलवायु सजती है हर शू॥

देश हमारा सबसे प्यारा।
भारतवर्ष जगत में न्यारा॥
भूमि सजाई है भारत की।
देवों ने इसकी रचना की॥

बड़भागी हम सबका जीवन।
जन्म भूमि यह वतन मिला बन॥
भारत माता कहते इसको।
जो पाले है हर जीवन को॥

आन-बान यह शान हमारी।
तारे विपदाओं से सारी॥
धरती-अम्बर इसके रक्षक।
बनता वक्त सभी का शिक्षक॥

जैसी करनी वैसी भरनी।
होती दाता की यह कथनी॥
भारत ने आजादी पाई।
देखी दुनिया ने सच्चाई॥

अमृत ऐसा कहाँ मिले है।
जैसा भारतवर्ष पिये है॥
भूल न पाते कुर्बानी को।
कहते अमृत आजादी को॥

परिचय-हीरा सिंह चाहिल का उपनाम ‘बिल्ले’ है। जन्म तारीख-१५ फरवरी १९५५ तथा जन्म स्थान-कोतमा जिला- शहडोल (वर्तमान-अनूपपुर म.प्र.)है। वर्तमान एवं स्थाई पता तिफरा,बिलासपुर (छत्तीसगढ़)है। हिन्दी,अँग्रेजी,पंजाबी और बंगाली भाषा का ज्ञान रखने वाले श्री चाहिल की शिक्षा-हायर सेकंडरी और विद्युत में डिप्लोमा है। आपका कार्यक्षेत्र- छत्तीसगढ़ और म.प्र. है। सामाजिक गतिविधि में व्यावहारिक मेल-जोल को प्रमुखता देने वाले बिल्ले की लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल और लेख होने के साथ ही अभ्यासरत हैं। लिखने का उद्देश्य-रुचि है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-कवि नीरज हैं। प्रेरणापुंज-धर्मपत्नी श्रीमती शोभा चाहिल हैं। इनकी विशेषज्ञता-खेलकूद (फुटबॉल,वालीबाल,लान टेनिस)में है।

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