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कहीं ऐसा ना हो!

अमल श्रीवास्तव 
बिलासपुर(छत्तीसगढ़)

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हरा, भरा यह खिलता उपवन,
पतझड़ ही ना बन जाए
भारत के भीतर भारत की,
अस्मत ही न छली जाए।

सच को सच, झूठे को झूठा,
कहने मे संकोच जहां
भारत वासी, हिंदुस्तानी,
बनने में संकोच जहां।
अगियारे, पछियारे, दाएं,
बाएं चारों ओर व्यथा
लोहे की औकात कहां जब,
सोने में ही जंग लगा।

खतरनाक साजिश में पड़कर,
गुलशन ही न उजड़ जाए।
भारत के भीतर भारत की…॥

चोर, उचक्के, जालसाज सब,
यौवन के पर्याय बने
पाखंडी, पापी, व्यभिचारी,
सत्ता के अभिप्राय बने।
कुर्सी चिपको की बीमारी,
नगर, डगर में फैल रही
बरबादी की स्वर्णिम प्लानिंग,
गाँव, गली में घूम रही।

सत्ता हित समझौता करके,
नीयत ही न बदल जाए।
भारत के भीतर भारत की…॥

गीत वेणु से अलग हुआ है,
शंख नाद से भटका है
मानव का विश्वास घृणा की,
सूली पर ही लटका है।
बुनियादी सिद्धांत, संहिता,
सभी ताक पर रखे हुए
गिरवी है सम्मान देश का,
हाथ रक्त से सने हुए।

क्षुद्र प्रकृति का खेल घिनौना,
खुद को ही न निगल जाए।
भारत के भीतर भारत की…॥

जाति, पंथ के आरक्षण से,
प्रतिभाओं का दमन हुआ
तुष्टिकरण की कुटिल चाल से,
मानवता का पतन हुआ।
राम नाम अपराध यहाँ पर,
सत्य बोलना पाप हुआ
जागो! चेतो! सोने वालों,
वोट-तंत्र अभिशाप हुआ।

बलिदानों से सींचा पौधा,
जड़ से ही न उखड़ जाए।
भारत के भीतर भारत की…॥

पहले ही हम बँटवारे का,
दंश भयंकर झेल चुके
सत्ता के मद के मतवाले,
खेल घिनौना खेल चुके।
एक बार फिर से उन्मादी,
जहरीला रंग डाल रहे
ऊँच-नीच का, राग-द्वेष का,
कीचड़ यहां उछाल रहे।

अमन चैन की यह धरती, फिर
से ही लाल न हो जाए।
भारत के भीतर भारत की…॥

नगर-डगर में, गाँव-गली में,
बमबारी भी देखी है
गलियारी से संसद तक में,
गद्दारी भी देखी है।
पत्थर से घायल सैनिक की,
लाचारी भी देखी है
खूनी राजनीति करने की,
मक्कारी भी देखी है।

झंझावती तूफानों से,
नौका ही न पलट जाए।
भारत के भीतर भारत की,
अस्मत ही न छली जाए…॥

परिचय–प्रख्यात कवि,वक्ता,गायत्री साधक,ज्योतिषी और समाजसेवी `एस्ट्रो अमल` का वास्तविक नाम डॉ. शिव शरण श्रीवास्तव हैL `अमल` इनका उप नाम है,जो साहित्यकार मित्रों ने दिया हैL जन्म म.प्र. के कटनी जिले के ग्राम करेला में हुआ हैL गणित विषय से बी.एस-सी.करने के बाद ३ विषयों (हिंदी,संस्कृत,राजनीति शास्त्र)में एम.ए. किया हैL आपने रामायण विशारद की भी उपाधि गीता प्रेस से प्राप्त की है,तथा दिल्ली से पत्रकारिता एवं आलेख संरचना का प्रशिक्षण भी लिया हैL भारतीय संगीत में भी आपकी रूचि है,तथा प्रयाग संगीत समिति से संगीत में डिप्लोमा प्राप्त किया हैL इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकर्स मुंबई द्वारा आयोजित परीक्षा `सीएआईआईबी` भी उत्तीर्ण की है। ज्योतिष में पी-एच.डी (स्वर्ण पदक)प्राप्त की हैL शतरंज के अच्छे खिलाड़ी `अमल` विभिन्न कवि सम्मलेनों,गोष्ठियों आदि में भाग लेते रहते हैंL मंच संचालन में महारथी अमल की लेखन विधा-गद्य एवं पद्य हैL देश की नामी पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैंL रचनाओं का प्रसारण आकाशवाणी केन्द्रों से भी हो चुका हैL आप विभिन्न धार्मिक,सामाजिक,साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से जुड़े हैंL आप अखिल विश्व गायत्री परिवार के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। बचपन से प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पुरस्कृत होते रहे हैं,परन्तु महत्वपूर्ण उपलब्धि प्रथम काव्य संकलन ‘अंगारों की चुनौती’ का म.प्र. हिंदी साहित्य सम्मलेन द्वारा प्रकाशन एवं प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री सुन्दरलाल पटवा द्वारा उसका विमोचन एवं छत्तीसगढ़ के प्रथम राज्यपाल दिनेश नंदन सहाय द्वारा सम्मानित किया जाना है। देश की विभिन्न सामाजिक और साहित्यक संस्थाओं द्वारा प्रदत्त आपको सम्मानों की संख्या शतक से भी ज्यादा है। आप बैंक विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ. अमल वर्तमान में बिलासपुर (छग) में रहकर ज्योतिष,साहित्य एवं अन्य माध्यमों से समाजसेवा कर रहे हैं। लेखन आपका शौक है।

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