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कितने ही रंग तुम…

बबीता प्रजापति ‘वाणी’
झाँसी (उत्तरप्रदेश)
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नारी:मर्यादा, बलिदान, हौंसले की मूरत…

मुस्कराती हो तो
बसंत संवार देती हो,
कितने ही रंग तुम
जीवन में उतार देती हो।

शर्म-हया गहना
है तुम्हारा
शर्माती हो तो,
हया के रंग उभार देती हो।

ममता स्नेह प्रेम की जननी हो
मगर…,
सम्मान की खातिर
शक्ति का अवतार लेती हो।

शिवाजी का शौर्य,
तुमसे ही तो है।
नन्हें बीज को,
तुम्हीं आकार देती हो॥

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