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कुछ घंटों के लिए ही सही…

प्रीति शर्मा `असीम`
नालागढ़(हिमाचल प्रदेश)
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मुख्यमंत्री जी के आते ही,
सुस्त हुआ प्रशासन
हरकत में आ जाता है,
सरकारी कर्मचारी कुर्सी पर
किस काम के लिए बैठे हैं,
उन्हें अपना काम
कुछ घंटों के लिए ही सही,
पर याद आ जाता है।

मुख्यमंत्री जी के आते ही,
स्वच्छता अभियान…
असल में…ऐसा होता है,
सिर्फ झाड़ू के साथ फोटो नहीं
दिखाई जाती है,
सफाई देखने का असल नजारा
तब नजर आता है।

हमारे क्षेत्र में इतने सफाई कर्मचारी हैं,
हर सफाई कर्मचारी सड़कों की
सफाई करता नजर आता है
चमक उठता है…हर हिस्सा,
जिस राह से मुख्यमंत्री जी गुजरेंगे
वह रास्ता संवर जाता है,
गंदगी के लगे ढेरों का उस राह से
नामो-निशान मिट जाता है।

उस कस्बे के सारे सरकारी विभाग,
हरकत में आ जाते हैं
अपना-अपना विकास कैसे किया है,
उसी की रूपरेखा चमकाते नजर आते हैं,
अपने विभाग को चूना लगाकर,
फिर अपनी कार्य नीतियों पर चूना फिरवाते हैं।

कुछ घंटों के लिए कस्बा व्यवस्थित हो जाता है,
शहर के चप्पे-चप्पे पर अनुशासन नजर आता है
बस मुख्यमंत्री जी के जाते ही,
हर नजारा ढल जाता है
अगले चक्कर तक विकास दिखाने का,
जज्बा फिर से धीमा हो जाता है।

ऐसा अनुशासन-सफाई देखकर लगता है कि…,
मुख्यमंत्री जी को हो सके तो
राज्य के हर क्षेत्र में महीने में,
एक चक्कर लगा लेना चाहिए।
इसी बहाने व्यवस्था का,
कुछ देर ही सही विकास का
एहसास होने देना चाहिए॥

परिचय-प्रीति शर्मा का साहित्यिक उपनाम `असीम` हैL ३० सितम्बर १९७६ को हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर में अवतरित हुई प्रीति शर्मा का वर्तमान तथा स्थाई निवास नालागढ़(जिला सोलन,हिमाचल प्रदेश) हैL आपको हिन्दी,पंजाबी सहित अंग्रेजी भाषा का ज्ञान हैL पूर्ण शिक्षा-बी.ए.(कला),एम.ए.(अर्थशास्त्र,हिन्दी) एवं बी.एड. भी किया है। कार्यक्षेत्र में गृहिणी `असीम` सामाजिक कार्यों में भी सहयोग करती हैंL इनकी लेखन विधा-कविता,कहानी,निबंध तथा लेख है।सयुंक्त संग्रह-`आखर कुंज` सहित कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैंL आपको लेखनी के लिए प्रंशसा-पत्र मिले हैंL सोशल मीडिया में भी सक्रिय प्रीति शर्मा की लेखनी का उद्देश्य-प्रेरणार्थ हैL आपकी नजर में पसंदीदा हिन्दी लेखक-मैथिलीशरण गुप्त,जयशंकर प्रसाद,निराला,महादेवी वर्मा और पंत जी हैंL समस्त विश्व को प्रेरणापुंज माननेवाली `असीम` के देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-“यह हमारी आत्मा की आवाज़ है। यह प्रेम है,श्रद्धा का भाव है कि हम हिंदी हैं। अपनी भाषा का सम्मान ही स्वयं का सम्मान है।”

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