ममता साहू
कांकेर (छत्तीसगढ़)
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सफ़र जिंदगी का नहीं, होता है आसान,
कुछ भी पंथ कठिन नहीं, चलने की लो ठान।
आए बनकर भूमि पर, हम सभी मेहमान,
निज कर्मों से सृष्टि में, सदा बढ़ाओ मान।
बच्चे, बूढ़े या युवा, सबको दो सम्मान,
यह जीवन दो रोज का, मत करना अभिमान।
खुशियाँ बाँटे औरों में, अक्सर जो इंसान,
उसके अधरों पर सदा, ईश रखे मुस्कान।
खिल्ली उड़ाए दूजों की, वह न बनता महान,
वही कहलाए श्रेष्ठ जो, दे दे क्षमादान॥