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खिलना फूलों-सा

बोधन राम निषाद ‘राज’ 
कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
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खिलना फूलों-सा यहाँ,महके सदा बहार।
होंठों पर मुस्कान हो,मिले सभी का प्यार॥
मिले सभी का प्यार,लगे जन-जन को प्यारा।
सुन्दर हो व्यवहार,तुझे पूजे जग सारा॥
कहे ‘विनायक राज’,गले तुम सबसे मिलना।
रखना हँसी जुबान,खुशी से हरदम खिलना॥

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