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खून से लिखी आजादी की कहानी

कवि योगेन्द्र पांडेय
देवरिया (उत्तरप्रदेश)
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जागरण के गीत गाकर,
शौर्य की गाथा सुनाकर
भारती के भाल पर नित,
पुष्प की माला सजाकर
दासता के बंधनों से, मुक्त होने की रवानी,
खून से लिखी गई है, आजादी की ये कहानी।

मृत्यु की वेदी पे चढ़कर,
क्रांति का इतिहास रचकर
थाम लिया जिसने तिरंगा,
दो कदम ही आगे बढ़कर
देश का सौभाग्य गढ़ने, काम आई नव जवानी,
खून से लिखी गई है, आजादी की ये कहानी।

आज फिर हुंकार भरता,
शत्रु का संहार करता
चल रहा है वीर सैनिक,
नित विजय की राह चढ़ता
है नमन उनको जो महि पे, छोड़ कर जाए निशानी,
खून से लिखी गई है, आजादी की ये कहानी।

आओ मंगल गान गाएं,
देश को सुंदर सजाएं
जो हुए बलिदान उनको,
एक दीपक हम जलाएं।
शूरवीरों के लिए नित, ये धरा रहती दीवानी,
खून से लिखी गई है, आजादी की ये कहानी॥