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गुलामी की भाषा में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’

माननीय प्रधानमंत्री जी,
माननीय गृह मंत्री जी,
माननीय संस्कृति मंत्री जी,
भारत सरकार

महोदय,
यह प्रसन्नता की बात है कि स्वयं आप, आपकी सरकार और आपका दल भारतीय भाषाओं और भारतीय संस्कृति को सर्वोच्च स्थान पर रखने की बात करता है। माननीय प्रधानमंत्री जी आपने देश-दुनिया में हिंदी के प्रयोग से राजभाषा हिंदी और भारत को प्रतिष्ठित कर भारत का मान-सम्मान बढ़ाया है, लेकिन सरकार में प्राय: इसके विपरीत होता दिखता है। आजादी के अमृत महोत्सव पर आजकल संस्कृति मंत्रालय घर-घर तिरंगा संबंधी प्रमाण-पत्र अंग्रेजी में जारी कर रहा है। उसमें ऊपर मंत्रालय का नाम तक भी केवल अंग्रेजी में है। प्रश्न उठता है कि घर-घर तिरंगा संबंधी प्रमाण-पत्र केवल अंग्रेजी में ही क्यों ? हिंदी में क्यों नहीं ? मंत्रालय में बताने-पूछने पर भी कोई उत्तर नहीं देता। यह भारत संघ की राजभाषा नीति का भी उल्लंघन है। यह देखना जिनका सरकारी दायित्व है, वे भी खामोश बैठे हैं। न कोई कहने वाला है, न सुनने वाला।
यदि यह प्रमाण-पत्र हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं में भी जारी किया जाता तो कितना अच्छा होता। अपनी भाषा के माध्यम से हर भारतीय को गर्व और गौरव होता। स्वतंत्रता के ७५ वर्ष बाद भी इस तरह की भाषाई परतंत्रता दुखी करती है, जबकि तकनीकी रूप से ऐसा करना आजकल बहुत आसान है, लेकिन मैकॉलेवादी सोच के चलते संस्कृति मंत्रालय ही भारत की भाषा-संस्कृति के प्रतिकूल खड़ा दिखाई देता है। भारत की भाषा-संस्कृति के लिए यह बहुत ही गंभीर मामला है कि, आजादी के अमृत महोत्सव पर भी गुलामी की भाषा में आजादी की बात और राष्ट्रीय ध्वज का प्रमाण-पत्र, यह भारत संघ की राजभाषा नीति का भी उल्लंघन है। तिरंगा प्रमाण-पत्र अंग्रेजी में होने से सामाजिक माध्यमों पर सरकार की खासी किरकिरी हो रही है। आजादी के अमृत महोत्सव पर हिंदी और अंग्रेजी के २ अलग-अलग प्रतीक चिह्न होने के कारण सरकारी आयोजनों सहित हर जगह आजादी के अमृत महोत्सव का अंग्रेजी प्रतीक चिह्न ही छाया हुआ है। गुलामी की भाषा में आजादी का अमृत महोत्सव आजादी का नहीं, गुलामी का संदेश देता दिखता है।
आप जानते ही हैं कि, भाषा से ही संस्कृति आगे बढ़ती है। भारतीय भाषाओं की उपेक्षा करके संस्कृति कैसे बचेगी या बढ़ेगी ? अंग्रेजी से भारतीय संस्कृति नहीं, पाश्चात्य संस्कृति बढ़ेगी। संस्कृति मंत्रालय का दायित्व तो भारतीय संस्कृति बढ़ाना है, लेकिन यह भारतीय भाषाओं से ही संभव है। यह चिंता का विषय है कि आजादी के अमृत महोत्सव से संबंधित सब-कुछ अंग्रेजी में हो रहा है। कृपया, समग्र सामग्री को द्विभाषी या बहुभाषी करने के लिए संबंधित अधिकारियों और उन एजेंसियों व अधिकारियों को आदेश दें, जिन्हें यह काम सौंपा गया है और इस लापरवाही के लिए संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई भी करें। गुलामी की भाषा में आजादी का अमृत महोत्सव मनाए जाने से सरकार की ही नहीं, भाजपा की कथनी और करनी पर भी सवाल खड़े होते हैं।
विनम्र अनुरोध है कि, इस संबंध में संबंधित मंत्रालयों और विभागों को समुचित आदेश-
निर्देश दें और आजादी के अमृत महोत्सव में संघ की राजभाषा नीति का अनुपालन तथा भारतीय भाषाओं का अधिकाधिक व अऩिवार्य प्रयोग करवाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करें। उचित कार्रवाई व उत्तर की अपेक्षा है।

सादर
डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’
(निदेशक-वैश्विक हिंदी सम्मेलन)