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घुटन का जीवन

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’
ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर)

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मेरी डायरी-भाग २

यह उन दिनों की बात है,जब मैं पत्रकारिता के क्षेत्र में शिखर पर था कि एक परिचित सम्माननीय बुजुर्ग व्यक्ति ने मुझे अपने पास बुलाया और इधर-उधर की अर्थहीन वार्तालाप करने लगे। मैं चिढ़ गया और मैंने उनसे क्षमा याचना करते हुए वहां से चलने की आज्ञा मांगी, चूंकि,मैं उनका अंतर्मन से हार्दिक आदर करता था।
मेरे चल पड़ने पर वे मेरे चेहरे पर छाए आक्रोश के भावों को समझते हुए सीधे मुद्दे की बात पर आए और कहने लगे- “आंगनवाड़ियों में बहुत ही भ्रष्टाचार हो रहा है।” जिस पर मैंने कहा कि-“आंगनवाड़ियों के निदेशक को लिखित शिकायत करो और उसकी प्रतिलिपियां पत्रकारों को दे दो।”
जिस पर वह आग-बबूला होकर बोले-“क्या मुझे मरवाएगा ?” मैंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा कि-“मैंने आपको क्यों मरवाना है ? आपने राय मांगी,जिसका मैंने आपको सुझाव दिया है। ” वह फिर मेरे पास सरकते हुए धीमे से बोले-“मैं आपको बता देता हूँं कि कौन,कहां पर भ्रष्टाचार कर रहा है, मगर मेरा नाम नहीं आना चाहिए।”
अब मुझसे रहा नहीं गया,जिसके कारण मैंने उन्हें निडरता से स्पष्ट कहा कि-“मौत तो जब आएगी तब देखा जाएगा,किंतु आप तो मरने से पहले ही अपनी अमर आत्मा को डर के कारण मार चुके हैं। कायरों की भांति मरने के बाद क्या आपकी आत्मा को चैन मिलेगा ? जबकि हम सबको ज्ञात है कि मृत्यु अटल है। फिर भी हम झूठे संसार में अंतरात्मा को दबाकर पूरा जीवन घुटन में जीते हैं,मगर सच का डटकर सामना और झूठ का विरोध कभी नहीं करते हैं,जिनके कारण आए दिन हृदय आघात एवं दिमाग की नस फटने से हो रही मृत्यु का आँकड़ा बढ़ रहा है।” यह कहकर मैं अत्यंत दुखी मन से उठा और वहां से चला आया था।
कुछ माह बाद पता चला कि उक्त व्यक्ति की हृदय आघात से मृत्यु हो गई है। यह सुनकर मन ही मन सोचा कि काश वह अपने मन पर पड़े असहननीय बोझ की पीड़ा को आंगनवाड़ियों के निदेशक को शिकायत करके कम कर लेते तो शायद उन्हें ‘हृदय आघात’ ना होता। इसके साथ ही अनेक प्रश्नों ने जन्म लिया कि क्या उनके फूल (हड्डियों के अवशेष) गंगा में प्रवाहित करने से या मंत्र उच्चारणों से उन्हें शांति और मुक्ति मिल पाएगी ?

परिचय-इंदु भूषण बाली का साहित्यिक उपनाम `परवाज़ मनावरी`हैl इनकी जन्म तारीख २० सितम्बर १९६२ एवं जन्म स्थान-मनावर(वर्तमान पाकिस्तान में)हैl वर्तमान और स्थाई निवास तहसील ज्यौड़ियां,जिला-जम्मू(जम्मू कश्मीर)हैl राज्य जम्मू-कश्मीर के श्री बाली की शिक्षा-पी.यू.सी. और शिरोमणि हैl कार्यक्षेत्र में विभिन्न चुनौतियों से लड़ना व आलोचना है,हालाँकि एसएसबी विभाग से सेवानिवृत्त हैंl सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप पत्रकार,समाजसेवक, लेखक एवं भारत के राष्ट्रपति पद के पूर्व प्रत्याशी रहे हैंl आपकी लेखन विधा-लघुकथा,ग़ज़ल,लेख,व्यंग्य और आलोचना इत्यादि हैl प्रकाशन में आपके खाते में ७ पुस्तकें(व्हेयर इज कांस्टिट्यूशन ? लॉ एन्ड जस्टिस ?(अंग्रेजी),कड़वे सच,मुझे न्याय दो(हिंदी) तथा डोगरी में फिट्’टे मुँह तुंदा आदि)हैंl कई अख़बारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैंl लेखन के लिए कुछ सम्मान भी प्राप्त कर चुके हैंl अपने जीवन में विशेष उपलब्धि-अनंत मानने वाले परवाज़ मनावरी की लेखनी का उद्देश्य-भ्रष्टाचार से मुक्ति हैl प्रेरणा पुंज-राष्ट्रभक्ति है तो विशेषज्ञता-संविधानिक संघर्ष एवं राष्ट्रप्रेम में जीवन समर्पित है।