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चंदा मामा पास के

डॉ. विकास दवे
इंदौर(मध्य प्रदेश )

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भारतीय बाल साहित्य में वर्षों से चंदा ‘मामा’ को इसी विशेषण के साथ हम सबने प्रेम से मामा का स्थान दिया है। इसी रिश्ते को बलवती बनाते हुए सैकड़ों कविताएं रची गई। कभी पूर्णिमा से अमावस की ओर जाते मामा को रूठते हुए मामा कहा गया, तो कभी तिथि के अनुसार सिकुड़ते हुए चंदा मामा को बच्चों ने ठंड से ठिठुर कर सिकुड़ते हुए मामा मान लिया।
कोई बच्चा कहानियों में यह कहता नजर आता था कि, धरती माता अपने नन्हें भैया चंदा के लिए रुई भरकर रजाई तैयार कर रही है।
इन सारे प्यारे-प्यारे प्रतीकों के बीच भारत के ‘इसरो’ द्वारा भेजे गए चंद्रयान ने जैसे ही चंद्रमा पर लैंडिंग (उतरना) की और इस दृश्य को टी.वी. पर इस देश के करोड़ों बच्चों ने एकसाथ देखा, तो यूँ लग रहा है मानो बाल साहित्य के सारे प्रतीक और प्रतिमान ही बदल गए हैं। आधुनिक युग की गूगल पीढ़ी को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब यह कहा कि “अब चंदा मामा दूर के नहीं, चंदा मामा बस एक टूर के होकर रह गए हैं” तो लगा सचमुच बाल साहित्यकर धन्य हो गए। आज देश का शीर्ष नेतृत्व भी बाल साहित्य उद्धृत कर रहे हैं। मैं भी बाल साहित्य और बाल पत्रकारिता का विद्यार्थी होने के नाते यही कहना चाहूंगा कि-
“चंदा मामा दूर के,
पुए पकाए बूर के।”
नहीं, अब भारत के बच्चे गाएंगे-
“चंदा मामा पास के,
पुए पकाएं आस के।”
और यह आस पूरी की हमारे चंद्रयान ने।

धरती माता की राखी लेकर गए यान को भारत के बच्चों की ओर से हृदय से आभार। अमिताभ बच्चन अंकल हमारी ओर से कहिए ना एक बार- “मामा आज खुश तो बहुत होंगें तुम। हँय ssss।”

परिचय-डॉ. विकास दवे का निवास इंदौर (मध्यप्रदेश)में है। ३० मई १९६९ को निनोर जिला चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) में जन्मे श्री दवे का स्थाई पता भी इंदौर ही है। आपकी पूर्ण शिक्षा-एम.फिल एवं पी-एच.डी. है। कार्यक्षेत्र-सम्पादक(बाल मासिक पत्रिका) का है। करीब २५ वर्ष से बाल पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं। सामाजिक गतिविधि में डॉ.दवे को स्वच्छता अभियान में प्रधानमंत्री द्वारा अनुमोदित एवं गोवा की राज्यपाल डॉ. मृदुला सिन्हा द्वारा ब्रांड एम्बेसेडर मनोनीत किया गया है। आप केन्द्र सरकार के इस्पात मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति में सदस्य हैं। इनकी लेखन विधा-आलेख तथा बाल कहानियां है। प्रकाशन के तहत सामाजिक समरसता के मंत्रदृष्टा:डॉ.आम्बेडकर,भारत परम वैभव की ओर, शीर्ष पर भारत,दादाजी खुद बन गए कहानी (बाल कहानी संग्रह),दुनिया सपनों की (बाल कहानी संग्रह), बाल पत्रकारिता और सम्पादकीय लेख:एक विवेचन (लघु शोध प्रबंध),समकालीन हिन्दी बाल पत्रकारिता-एक अनुशीलन (दीर्घ शोध प्रबंध), राष्ट्रीय स्वातंत्र्य समर-१८५७ से १९४७ तक(संस्कृति मंत्रालय म.प्र.शासन के लिए),दीर्घ नाटक ‘देश के लिए जीना सीखें’,(म.प्र.हिन्दी साहित्य अकादमी के लिए) और हिन्दी पाठ्य पुस्तकों में ४ रचनाएं सम्मिलित होना आपके खाते में है। १००० से अधिक रचनाओं का प्रकाशन बाल पत्रिका सहित विविध दैनिक-मासिक पत्र-पत्रिकाओं में है,जबकि ५० से अधिक शोध आलेखों का प्रकाशन भी हुआ है।डॉ.दवे को प्राप्त सम्मान में बाल साहित्य प्रेरक सम्मान २००५,स्व. भगवती प्रसाद गुप्ता सम्मान २००७, अ.भा. साहित्य परिषद नई दिल्ली द्वारा सम्मान २०१०,राष्ट्रीय पत्रकारिता कल्याण न्यास,दिल्ली सम्मान २०११,स्व. प्रकाश महाजन स्मृति सम्मान २०१२ सहित बाल साहित्य जीवन गौरव सम्मान २०१८ प्रमुख हैं। आपकी विशेष उपलब्धि म.प्र. शासन के पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा समाहित करने हेतु गठित सलाहकार समिति में सदस्य,म.प्र. शासन के पाठ्यक्रम में गीता दर्शन को सम्मिलित करने हेतु गठित सलाहकार समिति में सदस्य,म.प्र. साहित्य अकादमी के पाठक मंच हेतु साहित्य चयन समिति में सदस्य। होना है। आपको ७ वर्ष तक मासिक पत्रिका के सम्पादन का अनुभव है। अन्य में सम्पादकीय सहयोग दिया है। आपके द्वारा अन्य संपादित कृतियों में- ‘कतरा कतरा रोशनी’(काव्य संग्रह), ‘वीर गर्जना’(काव्य संग्रह), ‘जीवन मूल्य आधारित बाल साहित्य लेखन’,‘स्वदेशी चेतना’ और ‘गाथा नर्मदा मैया की’ आदि हैं। विकास जी की लेखनी का उद्देश्य-राष्ट्र की नई पौध को राष्ट्रीय चेतना एवं सांस्कृतिक गौरव बोध से ओतप्रोत करना है। विशेषज्ञता में देशभर की प्रतिष्ठित व्याख्यानमालाओं एवं राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में १५०० से अधिक व्याख्यान देना है। साथ ही विगत २० वर्ष से आकाशवाणी से बालकथाओं एंव वार्ताओं के अनेक प्रसारण हो चुके हैं। आपकी रुचि बाल साहित्य लेखन एवं बाल साहित्य पर शोध कार्य सम्पन्न कराने में है |