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चाँद के आने का इंतजार…

डॉ.अशोक
पटना(बिहार)
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करवा चौथ विशेष….

चाँद के आसमां पर,
उतर आने का इंतजार…
करवा चौथ का यह त्यौहार,
रहता है चाँद का इंतजार।
सुहागिनों का यह त्योहार,
इस दिन मांग करती है
अपने पति की लम्बी उम्र की,
माँ पार्वती व शिव से पति की
लम्बी उम्र का,
एक उपहार।
इसलिए इस दिन सुहागिनें,
बेसब्री से करती हैं
चाँद के आसमां पर ,
उतर आने का इंतजार…!!

सास की सरगी से होता है,
यह व्रत प्रारम्भ
चाँद के दीदार से,
खत्म होता है यह संग्राम।
निराहार रहकर महिलाएं,
करतीं हैं अन्तर्मन से
चन्द्रोदय की प्रतीक्षा।
इस दिन होती है ज़िन्दगी के,
सारथी की लम्बी उम्र की
एक कठिन परीक्षा।
बहुत खूब रहता है,
सुहागिनों को इस पावन पर्व का
वर्षों से अनन्त इंतजार।
इस दिन सुहागिनें,
खूब खुश रहतीं हैं
अपने पति से,
अनमोल उपहार को
हृदय व प्यार से,
पाने का इंतजार।
इसलिए इस दिन सुहागिनें,
बेसब्री से करतीं हैं,
चाँद के आसमां पर ,
उतर आने का इंतज़ार…!!

पति के स्वस्थ,दीर्घायु और,
निरोगी होने का है
है यह स्वस्थ व,
एक पवित्र त्योहार।
सुहागिनों को खूब पसंद है,
पति से मिलने वाले,
प्यार,माधुर्य और अपनापन
भाव से भ्रमण करने वाली,
यह सुहागिनों का है
एक उन्नत त्योहार।
सुहागिनें सूर्य उदय से पूर्व,
सरगी खाकर करतीं हैं
अपने प्यार के चाँद की,
लम्बी आयु के लिए
चन्द्रोदय का इस दिन,
हरपल बहुत बेसब्री से इंतजार।
इस सुन्दर पल के सौन्दर्य को,
आजमाने के लिए
श्रद्धा और विश्वास से,
सुहागिनें करतीं हैं
भगवान शिव और माँ पार्वती,
का हृदय से पूजन और व्रत
करतीं हैं पति की लम्बी आयु की,
श्रद्धा से जागृत करने वाली
एक हृदय से याचना,
अनुनय-विनय और प्रेम का,
अद्भुत एवं अपूर्व प्रार्थना व इजहार।
इसलिए इस दिन सुहागिनें,
बेसब्री से करतीं हैं,
चाँद के आसमां पर ,
उतर आने का इंतजार…!!

कार्तिक माह की,
चतुर्थी है यह एक शुभ दिन
सुहागिनें इसका इंतजार करतीं हैं,
जिसका नित्य प्रतिदिन।
चन्द्रमा के अर्ध्य के साथ,
पूर्ण होता है यह शुभ दिन।
सौन्दर्य की लहरें उठती,
तड़पते दिखती हैं यह
सुहागिनों के इस अपूर्व व,
पावन पर्व के खुबसूरत
दिन को यहां।
सब सुहागिनों में उत्सुकता से खूब,
खुशी का उधम सखियों व
परिवार के सुहागिन स्त्रियों के,
साथ मनाती हैं उत्सव
इस दिन खूब खुशी से यहां।
इसलिए इस दिन सुहागिनें,
बेसब्री से करती हैं ,
चाँद के आसमां पर,
उतर आने का इंतजार…!!

यह दिन है चन्द्रमा का,
जो खूब मस्ती से
सुहागिनों को तंग करता है,
खूब छकाता है हरपल।
सुहागिनों की नज़र रहती है,
आसमां पर नहीं हटती है
नज़र भी कुछ एक पल।
पति-पत्नी के प्यार का,
इज़हार रहता है
दिव्य ज्योति से प्रकाशित,
चन्द्रमा के निखार पर।
नाराज़ भी हो जाती है,
सुहागिनों खूब इस दिन
चन्द्रमा के प्रहार पर।
पति की लम्बी उम्र के लिए,
इसलिए खूब करतीं हैं,
मन्नत की प्राप्ति के लिए
यह व्रत इस दिन।
इसलिए इस दिन सुहागिनें,
बेसब्री से करतीं हैं,
चाँद के आसमां पर,
उतर आने का इंतजार..!!

परिचय-पटना(बिहार) में निवासरत डॉ.अशोक कुमार शर्मा कविता,लेख,लघुकथा और बाल कहानी लिखते हैं। आप डॉ.अशोक के नाम से रचनाकर्म में सक्रिय हैं। शिक्षा एम.काम.,एम.ए.(राजनीति शास्त्र,अर्थशास्त्र,हिंदी,इतिहास, लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास) सहित एल.एल.बी., एल.एल.एम.,एम.बी.ए.,सी.ए.आई.आई.बी. व पीएच-डी.(रांची) है। अपर आयुक्त (प्रशासन)पद से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा द्वारा लिखित अनेक लघुकथा और कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं,जिसमें-क्षितिज, गुलदस्ता,रजनीगंधा (लघुकथा संग्रह)आदि है। अमलतास,शेफालीका,गुलमोहर,चंद्रमलिका, नीलकमल एवं अपराजिता (लघुकथा संग्रह) आदि प्रकाशन में है। ऐसे ही ५ बाल कहानियाँ(पक्षियों की एकता की शक्ति,चिंटू लोमड़ी की चालाकी एवं रियान कौवा की झूठी चाल आदि) प्रकाशित हो चुकी है। आपने सम्मान के रूप में अंतराष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच द्वारा काव्य क्षेत्र में तीसरा,लेखन क्षेत्र में प्रथम,पांचवां,आठवां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।