सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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करवाचौथ विशेष…
रात आज पूजन की,
चाँद दिखलाओ मुख
सजी सभी नार देखो,
शरमाए यामिनी।
रूप का श्रृंगार देख,
चकित हैं सारे देव
अप्सरा भी चकित,
मन मोहे कामिनी।
माँग में सिंदूर सोहे,
बेंदी की चमक मोहे
काली धार काजल की,
देख रही चाँदनी।
ओठ लाल-लाल सोहे,
गले बीच हार सोहे
चूड़ियों की खनक ये,
बजा रही भामिनी।
करके सोलह श्रृंगार,
लिए हाथ पूजा थाल
पायल की छन-छन,
बजा रही मालिनी।
साजन का साथ रहे,
सदा ही सुहाग सजे
माँगने को आशीर्वाद,
जाय रहीं दामिनी।
करवा लिए हैं हाथ,
देखने को चाँद आज
आँगन बीच चक्कर,
लगा रहीं रागिनी।
दी है बड़ों ने सीख,
पैर पड़ो लो आशीष।
साजन के मुखड़े को,
देख रहीं सजनी॥