पद्मा अग्रवाल
बैंगलोर (कर्नाटक)
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करवा चौथ विशेष…
करवा चौथ का पावन त्यौहार है आया,
सोलह श्रंगार कर सजी है हर नारी
माँग में सिंदूर और पैरों में पायल,
मेहँदी रची हथेलियों में लिखा है पिया का नाम
कलाई में चूड़ियाँ सजी हैं कंगना के साथ।
पूजा की थाली में सज रहा है करवा,
दिल में बज रहा पिया के प्यार का संगीत
सदा सुहागन रहूँ चाँद से माँगे वरदान,
छलनी में दिया रख कर जब वह पिया को देखेगी
दुनिया की हर बला को साजन से दूर कर देगी।
हर सुहागन के दिल का होता है यही अरमान,
दिनभर भूखी-प्यासी रह कर पिया के प्यार में रखती उपवास
मन में रहती बेकरारी अपने प्रियतम के लिए,
कब गगन में निकलेगा वह प्यारा चाँद!
अपने साजन के चेहरे को देखते ही,
उसका मुरझाया-सा मुखड़ा खिल उठता
पानी का पहला घूँट उसके हाथों से पीकर,
उसकी दिनभर की तपस्या हो जाती है पूरी।
लंबी उम्र हो पिया की, बना रहे सदा उसका सुहाग,
हर जनम में साजन का साथ मिले।
प्यार का बंधन यूँ ही महकता रहे,
खुशियों से भरा रहे यह संसार॥