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चौमासा

ममता तिवारी ‘ममता’
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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रचनाशिल्प: ८-८-८-९ चरणान्त नगण

बादलों का जमघट, जल धरे तलछट
उमड़-घुमड़ कर, राह रोकते पथकर।
तड़ित तड़ चलित, गरजन विचलित
सर-सर चल कर, पवन है सहचर।

बूंद गिरे छम-छम, नाचे बरखा मगन
धूप को छिपा नयन मौन देख दिनकर।
खिल उठे उपवन, मेघ भरे हैं गगन
गुंजार भ्रमर कर, सुमन बैठा थककर।

ताल नदी नीरनिधि चंद दिनों की अवधि
बौराये बन जलधि, छलक रहा सरवर।
छा गयी हर डगर, हरियाली की लहर
जैसे रतन ठहर डाल पात में तरुवर।

कवि मन मधुकर, वर्षा रानी रसकर
बाढ़ बनता कहर हलधर को हितकर।
शीतल है मुखपर, छींट पड़े मनहर
नाचता मयूर मन, रिमझिम को सुनकर।

चले फुदक-फुदक वायु से हिले उदर,
झर झर के झरने, गिरे वेग से गिरिवर।
मोगरा मचलकर, माधवी फहर कर
हँसती है खिल-खिल, कचनार कुचलकर।

झिंगुरे की शोरगुल, विषधर ढुल-मुल
दादुर की टर-टर, जगत छुपा डरकर।
नहीं राह समतल, गढ्ढे अतल वितल
कीच-कीच पंक पर चरण रख कसकर॥

परिचय–ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ को हुआ है। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्थित बी.डी. महन्त उपनगर (जिला जांजगीर-चाम्पा)में निवासरत हैं। हिन्दी भाषा का ज्ञान रखने वाली श्रीमती तिवारी एम.ए. तक शिक्षित होकर समाज में जिलाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य(कविता ,छंद,ग़ज़ल) है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। पुरस्कार की बात की जाए तो प्रांतीय समाज सम्मेलन में सम्मान,ऑनलाइन स्पर्धाओं में प्रशस्ति-पत्र आदि हासिल किए हैं। ममता तिवारी की लेखनी का उद्देश्य अपने समय का सदुपयोग और लेखन शौक को पूरा करना है।