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जब प्रधानमंत्री मारग्रेट थ्रेचर के कर-कमलों से मिला ज्ञानपीठ पुरस्कार…

रश्मि बंसल झंवर-संजय ‘अनंत’
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स्व. महादेवी वर्मा जयंती…

छायावाद की महान स्तंभ;हिंदी साहित्य की अमर साधिका;आदर्श,करुणा,दया और ममता का जीवंत रूप;काव्य में वेदना,रहस्य,प्रणय और प्राकृतिक सौंदर्य को पिरोने वाली;गिल्लु,नीलकंठ,गौरा जैसे मानवेतर पात्रों में संवेदनाओं का रस भरने वाली; पंत और निराला की कलाई पर स्नेह की डोर सजाने वाली;प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्राचार्य; भारत का पहला महिला कवि सम्मेलन आयोजित करने वाली;साहित्य अकादमी,ज्ञानपीठ,पद्मभूषण, पद्मविभूषण जैसे सम्मानों को अलंकृत करने वाली महियषी महादेवी वर्मा को कोटि-कोटि प्रणाम।
आज महियषी महादेवी जी की जयंती है। अपनी सबसे प्रिय कवियित्री के श्री चरणों में नमन। ब्रिटिश प्रधानमंत्री मारग्रेट थ्रेचर,जो विश्व इतिहास में अपने दृण निर्णयों के कारण ‘आयरन लेडी’ के नाम से विख्यात थी और हिन्दी साहित्य के स्वर्णयुग की गौरवमय ध्वजा महियषी महादेवी वर्मा,दोनों श्री शक्ति की प्रतीक है। महियषी की यशकीर्ति उनके जीवनकाल में ही विश्वव्यापी हो चुकी थी। २८ नवंबर सन १९८३ के दिन महियषी को देश का सबसे बड़ा साहित्य सम्मान ज्ञान पीठ प्रदान किया जाना था और सौभाग्य देखिए ये सम्मान उनको मारग्रेट थ्रेचर के कर-कमलों से मिला। उनका साहित्य विश्व की अनेक भाषाओं में अनुवादित हो चुका है। उस दिन उनके सम्मान में मारग्रेट थ्रेचर ने जो कहा,वो महियषी महादेवी के हिमशिखर तुल्य कद की स्तुति मात्र ही है। महिला विद्यापीठ के माध्यम से नारी शिक्षा में उनका योगदान उतना ही अभिनंदन के योग्य है,जितना साहित्य में उनका योगदान। इतने विराट की व्याख्या मानो एक बूंद जल,समुद्र के समक्ष।

(सौजन्य:वैश्विक हिंदी सम्मेलन,मुम्बई)

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