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जल

डॉ.एन.के. सेठी
बांदीकुई (राजस्थान)

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जल ही कल…..

रचनाशिल्प:मात्राभार -२२ / यति -१२-१० यति के आगे-पीछे त्रिकल होगा। अंत गुरु वर्ण होगा । यह ८ चरणों वाला यानी ४ पंक्ति का छंद है। दो – दो पंक्ति के अंत में तुकांत आवश्यक।
सरिता सरोवर ताल, भूमि पर शोभते।
कानन उद्यान धरा, वृक्ष हम रोपते॥
करता प्रदूषित मनुज, गरल ये घोलता।
करता काम विपरीत, नहीं कुछ बोलता॥

विविध सरिताएं यहाँ, प्राण भी है यही।
शुद्ध जल देती रही, हरी इनसे मही॥
इनको रखें हम शुद्ध, नीर निर्मल बहे।
बुझ जाय सबकी प्यास, मातु इनको कहे॥

पावनी गंगा सरित, पाप धोती सभी।
जान्हवी सुरसरि कहे, बहे कलकल अभी॥
स्वर्ग से आई धरा, पार भव तारती।
मिलकर करें हम सभी, भव्य यह आरती॥

फैला प्रदूषण घोर, सरित दूषित अभी।
इनको रखें हम स्वच्छ, करें प्रयास सभी॥
अमृत जल बहता रहे, हरित भू को करे।
सम्पन्न हो धन धान्य, खुशी तन-मन भरे॥

नीर को बचाय मीत, बहुत अनमोल है।
स्वच्छ हम इसको रखें, शास्त्र के बोल है॥
सरिता न रीते कभी, नीर निर्मल भरा।
प्रसन्नचित होय कृषक, रम्य हो ये धरा॥

परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में प्राचार्य (बांदीकुई,दौसा) डॉ.एन.के. सेठी का बांदीकुई में ही स्थाई निवास है। १९७३ में १५ जुलाई को बड़ियाल कलां,जिला दौसा (राजस्थान) में जन्मे नवल सेठी की शैक्षिक योग्यता एम.ए.(संस्कृत,हिंदी),एम.फिल.,पीएच-डी.,साहित्याचार्य, शिक्षा शास्त्री और बीजेएमसी है। शोध निदेशक डॉ.सेठी लगभग ५० राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र वाचन कर चुके हैं,तो कई शोध पत्रों का अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशन हुआ है। पाठ्यक्रमों पर आधारित लगभग १५ से अधिक पुस्तक प्रकाशित हैं। आपकी कविताएं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। हिंदी और संस्कृत भाषा का ज्ञान रखने वाले राजस्थानवासी डॉ. सेठी सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत कई सामाजिक संगठनों से जुड़ाव रखे हुए हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत तथा आलेख है। आपकी विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध-पत्र का वाचन है। लेखनी का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है। मुंशी प्रेमचंद इनके पसंदीदा हिन्दी लेखक हैं तो प्रेरणा पुंज-स्वामी विवेकानंद जी हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-
‘गर्व हमें है अपने ऊपर,
हम हिन्द के वासी हैं।
जाति धर्म चाहे कोई हो,
हम सब हिंदी भाषी हैं॥’

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