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जिंदगी

प्रदीपमणि तिवारी ध्रुव भोपाली
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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(रचना शिल्प:बह्र/अर्कान-२१२×४-फाउलुन×४)
ज़िन्दगी आजमाती है इंसान को।
वो परखती है इंसाँ के ईमान को।

ज़िन्दगी हादसा खूबसूरत कहें,
ज़िल्लतें बस दिखें यार नादान को।

आम औ ख़ास दुनिया में सब लुट रहे,
लूटने कुछ चले आज भगवान को।

आसमाँ से बड़े भी मुख़ातिब हुए,
जो ख़ुदा कह रहे आज धनवान को।

बुझदिलों की है बारात आयी यहाँ,
ख़ौफ में ज़िन्दगी देख अंजान को।

जान पे आ गयी हो बला इस तरह,
कह रहे ख़ार है राह आसान को।

आसमानी वही जो क़िलेदार ‘ध्रुव’
बेख़बर ना रहम यार शैतान को॥

परिचय–प्रदीपमणि तिवारी का लेखन में उपनाम `ध्रुव भोपाली` हैl आपका कर्मस्थल और निवास भोपाल (मध्यप्रदेश)हैl आजीविका के लिए आप भोपाल स्थित मंत्रालय में सहायक के रुप में कार्यरत हैंl लेखन में सब रस के कवि-शायर-लेखक होकर हास्य व व्यंग्य पर कलम अधिक चलाते हैंl इनकी ४ पुस्तक प्रकाशित हो चुकी हैंl गत वर्षों में आपने अनेक अंतर्राज्यीय साहित्यिक यात्राएँ की हैं। म.प्र.व अन्य राज्य की संस्थाओं द्वारा आपको अनेक मानद सम्मान दिए जा चुके हैं। बाल साहित्यकार एवं साहित्य के क्षेत्र में चर्चित तथा आकाशवाणी व दूरदर्शन केन्द्र भोपाल से अनुबंधित कलाकार श्री तिवारी गत १२ वर्ष से एक साहित्यिक संस्था का संचालन कर रहे हैं। आप पत्र-पत्रिका के संपादन में रत होकर प्रखर मंच संचालक भी हैं।