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जीवन के रंग, होली के संग

डॉ. श्राबनी चक्रवर्ती
मनेन्द्रगढ़ (छत्तीसगढ़)
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जीवन और रंग…

नई कोपलें पेड़ों पर फूटी,
रंग-बिरंगी कलियाँ खिल उठी
सुनहरे वर्ण में सज्जित होकर,
नाचे बगिया में गेंदा, सेवंती और सूरजमुखी।

ढोल की थाप गूंज उठी भोर से गोधूलि,
बसंत मानो कुलांचे मारे मृगछौना की भांति
डाल-डाल पर कोयल कूकी,
नभ के खालीपन को चीर
देखो बसंत बहार की आभा,
अमरैया के मधुमाती समीर।

पलाश के पेड़ों की कतार दूर तक नजर आती,
लाल नारंगी पलाश की वृक्षावली यूँ वसुंधरा को सजाती
खुशियों की छटा बिखेरे तन-मन में उल्लास जगाती,
यह जीवन के रंग होली के संग हर फागुन में लाती।

कृष्ण की बंसी की जादुई धुन संग,
प्रणय गान के गुंजन की मंजुलता भरे नवरंग
प्रियतम की याद प्रिया को बींधे तीखे बाणों से,
बाट जोहते, हवा बसंती कुछ कह गई उसके कानों में।

अबीर-गुलाल का यह त्यौहार अनूठा,
लाल पीला हरा गुलाबी
जीवन के गहरे रंगों से भरे,
प्रेम और आनंद का संदेश लिए
पृथ्वी पर नए जीवन का सृजन करें।

गुजिया, बालूशाही और गुलाब जामुन की मिठास,
साथ में जब मिले चटपटे दही बड़े ,कचोरी का स्वाद
तो बढ़ जाए हमारी क्षुधा बार-बार,
चाव से खूब खाएं और खिलाएं हम सब ढेरों पकवान।

फागुन की ढोल-नगाड़े की थाप में,
उठे हमारे कदम खुद-ब-खुद
बसंतोत्सव होली के मधुर गीतों के साथ,
एक हो जाए हर हृदय के तार
झूम उठे मन में झंकार।

हर कोने में छा जाए उल्लास उमंग और मस्ती,
वो पलाश के मनमोहक फूलों की तरह।
धरती और गगन के एक सुस्वरता में बंध कर,
बेरंग ज़िंदगी में फिर एक बार जीवन के रंग भर कर॥

परिचय- शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्राध्यापक (अंग्रेजी) के रूप में कार्यरत डॉ. श्राबनी चक्रवर्ती वर्तमान में छतीसगढ़ राज्य के मनेन्द्रगढ़ में निवासरत हैं। आपने प्रारंभिक शिक्षा बिलासपुर एवं माध्यमिक शिक्षा भोपाल से प्राप्त की है। भोपाल से ही स्नातक और रायपुर से स्नातकोत्तर करके गुरु घासीदास विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पीएच-डी. की उपाधि पाई है। अंग्रेजी साहित्य में लिखने वाले भारतीय लेखकों पर डाॅ. चक्रवर्ती ने विशेष रूप से शोध पत्र लिखे व अध्ययन किया है। २०१५ से अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (बिलासपुर) में अनुसंधान पर्यवेक्षक के रूप में कार्यरत हैं। ४ शोधकर्ता इनके मार्गदर्शन में कार्य कर रहे हैं। करीब ३४ वर्ष से शिक्षा कार्य से जुडी डॉ. चक्रवर्ती के शोध-पत्र (अनेक विषय) एवं लेख अंतर्राष्ट्रीय-राष्ट्रीय पत्रिकाओं और पुस्तकों में प्रकाशित हुए हैं। आपकी रुचि का क्षेत्र-हिंदी, अंग्रेजी और बांग्ला में कविता लेखन, पाठ, लघु कहानी लेखन, मूल उद्धरण लिखना, कहानी सुनाना है। विविध कलाओं में पारंगत डॉ. चक्रवर्ती शैक्षणिक गतिविधियों के लिए कई संस्थाओं में सक्रिय सदस्य हैं तो सामाजिक गतिविधियों के लिए रोटरी इंटरनेशनल आदि में सक्रिय सदस्य हैं।

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