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जीवन भर सुख पाते

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)
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श्राद्ध पक्ष विशेष…

श्राद्ध-कर्म से पितृ हमारे,परम तुष्ट हो जाते।
पितरों के आशीषों से हम,जीवन भर सुख पाते॥

श्राद्ध-कर्म इक चेतना,यह तो पावन काम,
श्राद्ध-कर्म नित मांगलिक,पुरखों का है धाम।
आशीषें जब नित झरें,वंशज हों सम्पन्न,
पुरखों की होती दया,हम नहिं कभी विपन्न।
श्रद्धा से हम भरकर सारे,श्राद्ध-कर्म रम जाते,
पितरों के आशीषों से हम,जीवन भर सुख पाते…॥

पितर-पक्ष में पाक बन,रहना होगा नित्य,
मन-अंतर शुचिता रखें,तभी संग आदित्य।
पाप,क्रोध,हिंसा नहीं,रोशन रखें विचार,
शिथिल रखें आचार नहिं,साथ रहे उजियार।
श्रद्धा को गहकर हम सारे,कर्म करें तब भाते,
पितरों के आशीषों से हम,जीवन भर सुख पाते…॥

घर में पावनता पले,तभी बनेगी बात,
पितरों का हो आगमन,मिले हमें सौगात।
सदियों से यह वह रहा,जो कहता है धर्म,
संस्कारों का लें समझ,आज सभी तो मर्म।
हमें सदा वह ही करना है,जो गुरुजन सिखलाते,
पितरों के आशीषों से हम,जीवन भर सुख पाते…॥

श्राद्ध-दिवस में नीतिपथ,चलना होगा मीत,
तभी मिलेगा रीति को,पावनता सँग जीत।
रहें सात्विक हर तरह,तज दें सभी विकार,
रहें सहज,करुणामयी,धर्मपगा आचार।
श्राद्ध-कर्म की गाथा गाकर,ग्रंथ सुपथ बतलाते,
पितरों के आशीषों से हम,जीवन भर सुख पाते…॥

पितर-पक्ष उजला सदा,रहो विनत बन आप,
मान धर्म अब बंधुवर,हरना कुल की शाप।
सत्कर्मों से ज़िन्दगी,पाती है नव रूप,
सुखसँग पाते हैं दिवस,वरदानों की धूप।
आलोकित जीवन को करके,ग़म सब दूर हटाते,
पितरों के आशीषों से हम,जीवन भर सुख पाते…॥

परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान बसेरा मंडला(मप्र) में है,जबकि स्थायी निवास ज़िला-अशोक नगर में हैL आपका जन्म १९६१ में २५ सितम्बर को ग्राम प्राणपुर(चन्देरी,ज़िला-अशोक नगर, मप्र)में हुआ हैL एम.ए.(इतिहास,प्रावीण्यताधारी), एल-एल.बी सहित पी-एच.डी.(इतिहास)तक शिक्षित डॉ. खरे शासकीय सेवा (प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष)में हैंL करीब चार दशकों में देश के पांच सौ से अधिक प्रकाशनों व विशेषांकों में दस हज़ार से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई हैंL गद्य-पद्य में कुल १७ कृतियां आपके खाते में हैंL साहित्यिक गतिविधि देखें तो आपकी रचनाओं का रेडियो(३८ बार), भोपाल दूरदर्शन (६ बार)सहित कई टी.वी. चैनल से प्रसारण हुआ है। ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं(विशेषांकों)का सम्पादन कर चुके डॉ. खरे सुपरिचित मंचीय हास्य-व्यंग्य  कवि तथा संयोजक,संचालक के साथ ही शोध निदेशक,विषय विशेषज्ञ और कई महाविद्यालयों में अध्ययन मंडल के सदस्य रहे हैं। आप एम.ए. की पुस्तकों के लेखक के साथ ही १२५ से अधिक कृतियों में प्राक्कथन -भूमिका का लेखन तथा २५० से अधिक कृतियों की समीक्षा का लेखन कर चुके हैंL  राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में १५० से अधिक शोध पत्रों की प्रस्तुति एवं सम्मेलनों-समारोहों में ३०० से ज्यादा व्याख्यान आदि भी आपके नाम है। सम्मान-अलंकरण-प्रशस्ति पत्र के निमित्त लगभग सभी राज्यों में ६०० से अधिक सारस्वत सम्मान-अवार्ड-अभिनंदन आपकी उपलब्धि है,जिसमें प्रमुख म.प्र. साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार(निबंध-५१० ००)है।

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