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जीवन रहस्य

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’
धनबाद (झारखण्ड) 
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यह दुनिया है मतलब की,
इसमें तू मत खोना प्यारे
यहाँ ना कोई अपना है,
सब है मृगतृष्णा प्यारे।

रूपया पैसा बंगला गाड़ी,
बेटा-बेटी और नाती पोता
सब है मोह के बंधन प्यारे,
बस कर्म ही होगा साथ तेरे।

मत कर गुमान धन पर,
न तेरा था न तेरा रहेगा
जंजीर बनकर यह तेरे,
परलोक को भी हरेगा।

जीवन पथ में चलने वाले,
फूलों की चाह रखने वाले
मत घबरा तू यहाँ काँटों से,
फूल काँटे नियति जीवन के।

कर याद उद्देश्य तू यहाँ आने का,
सोंच स्वर्णिम इतिहास बनाने का
आने-जाने वाले हैं यहाँ अनगिनत,
बिरले ही होते महानता में परिणत।

आया है अब कर तू सतकर्म,
छोड़ तू हिन्दू और मुसलमान
परोपकारी बन हितकारी बन,
बनकर तू एक सच्चा इन्सान।

कहता ‘राजू’ यह न तेरा अपना घर,
यह विश्रामगृह मात्र तेरा है
सब-कुछ छोड़ यहाँ से तुम्हें जाना है,
कर भक्ति,ईश्वर में यदि मिल जाना है।

यहाँ सतकर्म है मात्र सत्य,
कर्म बिना न कोई भी तथ्य।
मान यही है जीवन रहस्य,
यही है जीवन रहस्य…॥

परिचय– साहित्यिक नाम `राजूराज झारखण्डी` से पहचाने जाने वाले राजू महतो का निवास झारखण्ड राज्य के जिला धनबाद स्थित गाँव- लोहापिटटी में हैL जन्मतारीख १० मई १९७६ और जन्म स्थान धनबाद हैL भाषा ज्ञान-हिन्दी का रखने वाले श्री महतो ने स्नातक सहित एलीमेंट्री एजुकेशन(डिप्लोमा)की शिक्षा प्राप्त की हैL साहित्य अलंकार की उपाधि भी हासिल हैL आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी(विद्यालय में शिक्षक) हैL सामाजिक गतिविधि में आप सामान्य जनकल्याण के कार्य करते हैंL लेखन विधा-कविता एवं लेख हैL इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को दूर करने के साथ-साथ देशभक्ति भावना को विकसित करना हैL पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेमचन्द जी हैंL विशेषज्ञता-पढ़ाना एवं कविता लिखना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी हमारे देश का एक अभिन्न अंग है। यह राष्ट्रभाषा के साथ-साथ हमारे देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसका विकास हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए अति आवश्यक है।

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