कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,
हैदराबाद (तेलंगाना)
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ज़िंदगी का नाम दोस्ती… (मित्रता दिवस विशेष)….
महकाओ मन-मंदिर में मधुमय मैत्री की माला,
मिलाओ मुस्कानों से मन, मिट जाए हर ज्वाला
मिटाओ मतभेदों का मल, मधुर मिलन बरसाओ,
महिमाओ मित्रत्व-मंत्र, मानवता महकाओ।
थामो थके चरणों को, थिर विश्वास जगाओ,
तनाओ त्याग का तरु, तपते तन को छायो।
तराशो तन-मन को, तप से तेज सजाओ,
तारो तम के तीर, तरल प्रेम बरसाओ।
सुनाओ सत्य-सुगंधित सरस स्नेह की सरिता,
सँवारो संबंधों को, सरल सद्भाव-स्मृति सा
संजोओ सपनों को संग, सुकृत-सुमन खिलाओ,
सफलाओ संग-साथ से सुनहरा संसार बनाओ।
बिखेरो विश्वास-विभा, विनय-वृंद मुस्काए,
बसाओ भावों का वन, वसुधा वंदन गाए।
बढ़ाओ बंधुत्व-बल, बनो बरगद की छाया,
बचाओ बिखरते मन, बने बंधन की माया।
जीओ जीवन-ज्योति बन, जग में ज्योत्स्ना भर दो,
जगाओ जन-जन में जनहित का जतन कर दो।
गाओ गौरव-गीत सदा, गूँजे गगन-गली में,
मानो ज़िंदगी का नाम दोस्ती ही हर दिल में॥
परिचय – कवि व अनुवादक कमलेकर नागेश्वर राव का साहित्यिक उपनाम ‘कमल’ है। आप सरकारी अध्यापक (हिंदी) ने रूप में जिला नागर कर्नूल के वेल्दंडा में कार्यरत हैं। तेलंगाना राज्य के रंगा रेड्डी जिले में निवासरत ‘कमल’ की तेलुगू और हिंदी के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ व विशेष आलेख प्रकाशित होते रहते हैं। इनको श्री श्री कला वेदिका राजमंड्री वालों से ‘साहिती मित्रा’ पुरस्कार, आदित्य संस्कृति (मप्र) से ‘हिंदी सेवी’ तथा डाॅ.सीता किशोर खरे स्मारक साहित्य पुरस्कार आदि मिले हैं।