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ज्ञान का प्रबंध चाहिए…

कवि योगेन्द्र पांडेय
देवरिया (उत्तरप्रदेश)
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साथ जो निभाए, साथी बन सुख-दु:ख में,
मित्रता का सच्चा कोई, अनुबंध चाहिए
मधुर-मधुर वाणी, से जो मन मोह ले वो,
प्रेम की सुधा में डूबा, मकरंद चाहिए।

नित नई राह दिखलाए, जन-जन को जो,
कविता में जागरण, वाला छंद चाहिए।
भटक रही है युवा पीढ़ी, अंधकार में ये,
इनके निमित ज्ञान, का प्रबंध चाहिए॥

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