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तुम्हारे जाने के बाद…

कवि योगेन्द्र पांडेय
देवरिया (उत्तरप्रदेश)
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तुम्हारे जाने के बाद
भूल गया है मौसम बदलना,
पक्षी भूल गए हैं चहचहाना।
तुम होते थे, सब होता था
तुम हँसते थे, सब हँसते थे,
तुम्हारे पास बैठके
भूल जाते थे खुद को।
तुम सिर्फ मेरे ही नहीं, बल्कि
तुम करीब थे बुलबुल के
तुम करीब थे गिलहरी के,
तुम करीब थे फूलों के।
तुम्हें फिर आना होगा,
सिर्फ मेरे लिए ही नहीं
बुलबुल के लिए, गिलहरी के लिए,
फूलों के लिए॥

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