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तुम जहाँ हो…

सारिका त्रिपाठी
लखनऊ(उत्तरप्रदेश)
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जिन अंधेरों से तुम गुजर रहे हो
उन्हीं अंधेरों में,
मैं अपने उजालों से झुलस रही हूँ।

तुम जिन तनहाइयों में बिखर रहे हो
उन्हीं तनहाइयों में,
मैं अपने शोर से सिमट रही हूँ।

तुम जिस बेबसी से गुजर रहे हो
उन्हीं बेबसी में,
मैं उम्मीदों को सहला रही हूँ।

जीवन के जिस पड़ाव पे तुम उचट रहे हो
उन्हीं पड़ाव में,
मैं प्रतीक्षा की कंदील को हवा से बचा रही हूँ॥

परिचय-सारिका त्रिपाठी का निवास उत्तर प्रदेश राज्य के नवाबी शहर लखनऊ में है। यही स्थाई निवास है। इनकी शिक्षा रसायन शास्त्र में स्नातक है। जन्मतिथि १९ नवम्बर और जन्म स्थान-धनबाद है। आपका कार्यक्षेत्र- रेडियो जॉकी का है। यह पटकथा लिखती हैं तो रेडियो जॉकी का दायित्व भी निभा रही हैं। सामाजिक गतिविधि के तहत आप झुग्गी बस्ती में बच्चों को पढ़ाती हैं। आपके लेखों का प्रकाशन अखबार में हुआ है। लेखनी का उद्देश्य- हिन्दी भाषा अच्छी लगना और भावनाओं को शब्दों का रूप देना अच्छा लगता है। कलम से सामाजिक बदलाव लाना भी आपकी कोशिश है। भाषा ज्ञान में हिन्दी,अंग्रेजी, बंगला और भोजपुरी है। सारिका जी की रुचि-संगीत एवं रचनाएँ लिखना है।