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दल दल-इंसान

मीरा जैन
उज्जैन(मध्यप्रदेश)

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कमल के फूल को देख नवयौवना ने अपनी शंका का समाधान चाहा-
‘मित्र कमल ! एक बात बताओ। तुम इस दलदल के साथ रहकर भी एकदम स्वस्थ, सुंदर, निर्मल, पावन, प्रसन्न कैसे रहते हो ? मैं तो इंसानों के बीच रहकर भी हमेशा भयभीत रहती हूँ। वास्तव में आपकी शक्ति और हिम्मत का कोई जवाब नहीं ?’
इस पर कमल के फूल ने मुस्कुराते हुए बहुत ही सटीक खूबसूरत जवाब दिया-
‘बहना ! वास्तव में शक्तिशाली हम नहीं, दल दल ही है। आंधी आए या तूफान, चाहे कितनी भी विषम परिस्थिति हो, किंतु यह दलदल कभी अपनी सीमाएं नहीं लांघता है और हमें पूर्ण विश्वास है कि भविष्य में भी यह कभी अपनी सीमाएं नहीं लांघेगा। इसीलिए हम निश्चिंत, स्वस्थ एवं मस्त है।’

नवयौवना को महसूस हुआ, विकृत मानसिकता के पुरुषों से तो यह दलदल भला जिस पर कमल आँख मूंद कर विश्वास तो कर सकते हैं।’

परिचय-श्रीमति मीरा जैन का जन्म २ नवम्बर को जगदलपुर (बस्तर)छत्तीसगढ़ में हुआ है। शिक्षा-स्नातक है। आपकी १००० से अधिक रचनाएँ अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से व्यंग्य,लघुकथा व अन्य रचनाओं का प्रसारण भी हुआ है। प्रकाशित किताबों में-‘मीरा जैन की सौ लघुकथाएं (२००३)’ सहित ‘१०१ लघुकथाएं’ आदि हैं। इनकी विशेष उपलब्धि-वर्ष २०११ में ‘मीरा जैन की सौ लघुकथाएं’ हैं। आपकी पुस्तक पर विक्रम विश्वविद्यालय (उज्जैन) द्वारा शोध कार्य करवाया जा चुका है,तो अनेक भाषा में रचनाओं का अनुवाद एवं प्रकाशन हो भी चुका है। पुरस्कार में अंतर्राष्ट्रीय,राष्ट्रीय तथा राज्य स्तरीय कई पुरस्कार मिले हैं। प्राइड स्टोरी अवार्ड २०१४,वरिष्ठ लघुकथाकार साहित्य सम्मान २०१३ तथा हिंदी सेवा सम्मान २०१५ से भी सम्मानित किया गया है। २०१९ में भारत सरकार के विद्वानों की सूची में आपका नाम दर्ज है। श्रीमती जैन कई संस्थाओं से भी जुड़ी हुई हैं। बालिका-महिला सुरक्षा,उनका विकास,कन्या भ्रूण हत्या एवं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ आदि कई सामाजिक अभियानों में भी सतत संलग्न हैं।

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