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दिखावा

अजय जैन ‘विकल्प’
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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मत कीजिए श्रद्धा में दिखावा,मन से ही निभाईए,
रीति-नीति,दान-पुण्य से स्वर्ग का रास्ता मत बनाईए।

अरे,जब जिंदा माँ-बाप को दिया कष्ट,तो अब ढोंग क्यों,
उन्हें रखा भूखा,अब जी भर खीर-पूड़ी-हलवा मत खिलाईए।

लिया जन्म उनसे तो,कुछ फर्ज भी हैं हमारे,
ऐसे जीते-जी तो उनका जी मत दुखाइए।

रख लो जीते-जी प्रेम से बस सम्मान उनका,
उनके रहते ही प्यार,श्रद्धा,संस्कार सब निभाइए॥

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